नेहरू की 'अटल' भविष्‍यवाणी और वाजपेयी के वो शब्‍द जो इतिहास बन गए

Recommended Video

    Atal Bihari Vajpayee को देखकर Jawaharlal Nehru ने की थी भविष्यवाणी, हुआ था सच | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्‍ली। अटल बिहारी वाजपेयी ने जीवन भर कांग्रेस विरोध की राजनीति की। उन्‍होंने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की नीतियों की कड़ी आलोचना की। कई मौकों पर वाजपेयी उनकी तारीफ भी करते थे। वाजपेयी ने जब पहली बार संसद पहुंचे तो उन्‍होंने सरकार को कई मोर्चों पर घेरा। विदेश मामलों पर उनकी गहरी समझ, बेहद शानदार हिंदी और मंत्रमुग्‍ध करने वाली भाषण शैली देखकर पंडित नेहरू बेहद प्रभावित हो गए थे। उस वक्‍त वाजपेयी के बारे में नेहरू कहा था, 'यह युवक एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा।' नेहरू की यह भविष्‍यवाणी एकदम सच साबित हुई।

    नेहरू और वाजपेयी से जुड़े हैं कई संयोग

    नेहरू और वाजपेयी से जुड़े हैं कई संयोग

    नेहरू और वाजपेयी के बीच रिश्‍ता बड़ा ही अलग था। कांग्रेस पार्टी और देश का पहला प्रधानमंत्री बनने का सौभाग्‍य नेहरू को मिला तो वाजपेयी भी बीजेपी के पहले पीएम बने और पहले ऐसे गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री रहे, जिन्‍होंने 6 बार लाल किले पर तिरंगा फहराया। वाजपेयी का एक और नेहरू कनेक्‍शन है। वाजपेयी ने पहली बार 1955 में लखनऊ से चुना लड़ा था। यह सीट पंडित नेहरू की बहन विजयलक्ष्‍मी पंडित के इस्‍तीफे के बाद खाली हुई थी। हालांकि, वह इस चुनाव में हार गए थे, लेकिन उनकी भाषण शैली के चर्चे दूर-दूर तक होने लगे थे। दो साल बाद 1957 में वाजपेयी ने तीन लोकसभा सीटों से पर्चा दाखिल किया। बलरामपुर से वह जीत गए, मथुरा में उनकी जमानत जब्‍त हुई, जबकि लखनऊ में उन्‍हें अच्‍छे-खासे वोट मिले, पर जीत नहीं सके।

     जब विदेश मंत्री बने वाजपेयी तो नेहरू की तस्‍वीर को लेकर कही ये बातें

    जब विदेश मंत्री बने वाजपेयी तो नेहरू की तस्‍वीर को लेकर कही ये बातें

    इतिहासकार रामचंद्र गुहा के मुताबिक, 1977 में मोरारजी देसाई की सरकार में वाजपेयी विदेश मंत्री बने थे। वह चार्ज लेने जब साउथ ब्‍लॉक स्थित दफ्तर पहुंचे तो उन्‍होंने अपने सचिव से कहा, 'मुझे याद है जब पहले मैं इस दफ्तर में आया था तो यहां पंडितजी की तस्‍वीर लगी थी। वो तस्‍वीर कहां गई? उस तस्‍वीर को वापस लगाओ।' दरअसल, अधिकारियों ने नेहरू की तस्‍वीर को यह सोचकर हटा दिया था कि कहीं वाजपेयी नाराज न हो जाएं।

     नेहरू की मृत्‍यु पर वाजपेयी के वो शब्‍द जो इतिहास बन गए

    नेहरू की मृत्‍यु पर वाजपेयी के वो शब्‍द जो इतिहास बन गए

    वाजपेयी प्रखर वक्‍ता थे, सरकार की कमियों को वह तथ्‍यों के साथ संसद में रखा करते थे और इस तरह रखा करते थे कि सत्‍ता पक्ष जवाब नहीं दे पाता था। अपने शुरुआती राजनीतिक जीवन में वाजपेयी ने नेहरू और कांग्रेस दोनों की खूब आलोचना की, लेकिन 1964 में नेहरू की मृत्यु के बाद वाजपेयी ने संसद में ऐसा भाषण दिया तो जो इतिहास बन गया। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर कैसे राजनीति की जाती है, वाजपेयी ने इसका बड़ा उदाहरण पेश किया। वाजपेयी ने कहा, 'पंडितजी की मृत्यु देश के लिए ऐसी हैं, जैसे कोई सपना अधूरा छूट गया हो, जैसे कोई गीत खामोश हो गया हो, उनकी मृत्यु केवल परिवार या किसी पार्टी के लिए ही क्षति नहीं है बल्कि पूरे देश के लिए दुःख की बात है।'

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+