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Atal Bihari Vajpayee: 'आजकल शाहरुख खान का नाम बहुत चल रहा है', अटल बिहारी ने किससे कही थी ये बात ?

Atal Bihari Vajpayee: 'भारत रत्न' और तीन बार देश के पीएम रहे अटल बिहारी वाजपेयी की आज पुण्यतिथि है, पूरा देश उन्हें नमन कर रहा है। करिश्माई व्यक्तित्व के मालिक अटल बिहारी बाजपेई उन चुनिंदा नेताओं में शामिल रहे, जिनकी विपक्ष भी तारीफ करता था।

Atal Bihari Vajpayee

वो भाजपा के ही नहीं बल्कि सियासत के उन आदर्श चेहरों में से एक रहे जिनमें सौम्यता, सहनशीलता, मर्यादा और औलकिक ज्ञान की तस्वीर नजर आती थी। लोकप्रिय नेता और वक्ता के रूप मे विख्यात अटल बिहारी बाजपेयी कवि हृदय थे, अपनी खूबसूरत लेखनी के जरिए गंभीर बातों को भी आसानी से कह देने वाले अटल बिहारी बाजपेयी अनुपम विचार के मालिक तो थे ही, साथ ही आशावादी सोच रखने वाले वो एक जमीनी नेता भी थे।

अटल बिहारी की कविताएं दिलों पर दस्तक देती हैं

उनका बहुत सारी लोकप्रिय कविताएं हैं, जो सीधा दिलों पर दस्तक देती हैं। उन्ही में से एक कविता है 'क्या खोया क्या पाया जग में', जिसे कि आवाज दी थी गजल सम्राट जगजीत सिंह ने और ये कविता शाहरुख खान पर फिल्मायी गई थी। इस बारे में एक दिलचस्प खुलासा खुद जगजीत सिंह ने ही किया था। ये बात साल 1999 की है, जब अटल बिहारी बाजपेयी ने जगजीत सिंह को फोन करके पूछा था कि उनके कविता वाले वीडियो में कौन प्ले करने जा रहा है?

'आजकल शाहरुख का नाम बहुत चल रहा है'

तो जगजीत सिंह ने कहा था कि 'अभी कुछ तय नहीं किया है', तो इस पर अटल बिहारी बाजपेयी ने ही कहा था कि 'आजकल शाहरुख खान का नाम बहुत चल रहा है, आप उसे देख सकते हैं।'

शाहरुख खान ने जताया था आभार

जिसके बाद शाहरुख खान इस वीडियो के लिए फाइनल हुए थे। शाहरुख खान ने इसके लिए दिल से अटल बिहारी और जगजीत सिंह का आभार जताया था, ये वीडियो उस वक्त बहुत लोकप्रिय हुआ था, जिसे 'सारेगामा गजल' ने अपने यूट्यूब चैनल पर शेयर किया था। इस वीडियो में वीओ 'अमिताभ बच्चन' का था, इ्स कविता में जीवन के अलग-अलग फेज को बहुत ही मनोरम ढंग से प्रस्तुत किया गया था, जो कि आज भी दिल को छू जाती है।

यहां पढ़ें पूरी कविता...

  • क्या खोया क्या पाया जग में
  • मिलते और बिछड़ते मग में
  • मुझे किसी से नहीं शिकायत
  • यद्यपि छला गया पग-पग में
  • एक दृष्टि बीती पर डालें,
  • यादों की पोटली टटोलें
  • पृथ्वी लाखों वर्ष पुरानी
  • जीवन एक अनंत कहानी
  • पर तन की अपनी सीमाएं
  • यद्यपि सौ शरणों की वाणी
  • इतना काफी है अंतिम दस्तक पर,
  • खुद दरवाजा खोलें।
  • जन्म मरण अविरत फेरा जीवन बंजारों का डेरा
  • आज यहां कल कहां कूच है
  • कौन जानता किधर
  • सवेरा अंधियारा आकाश असीमित,
  • प्राणों के पंखों को तौलें।
  • अपने ही मन से कुछ बोलें।
  • क्या खोया क्या पाया जग में...।

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