पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी ने बताया क्यों बॉर्डर पर बार-बार बेकाबू हो रहा है चीन
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच 15 जून के बाद लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर तनाव शायद साल 1990 में हुई कारगिल की जंग के बाद सबसे बड़ा सीमा विवाद बन गया है। सोमवार को गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सहयोगी रहे शक्ति सिन्हा ने एक इंटरव्यू में कहा है कि चीन के साल 2049 के मास्टर प्लान के सामने भारत सबसे बड़ा रोड़ा है। इसलिए ही वह एलएसी पर इतने बड़े स्तर पर समस्याएं पैदा कर रहा है।

2049 तक चीन बनना चाहता है बादशाह
वडोदरा स्थित एमएस यूनिवर्सिटी के अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिसी रिसर्च एंड इंटरनेशनल स्टडीज के डायरेक्ट शक्ति सिन्हा ने न्यूज 18 को दिए इंटरव्यू में कहा कि चीन बीते एक दशक के दौरान ज्यादा आक्रामक हुआ है। उसे लगता है कि वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने का समय आ चुका है। वह पूरी दुनिया पर अपना दखल बढ़ाना चाहता है। उन्होंने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का सपना है कि चीन को साल 2049 तक पूरी तरह विकसित, अमीर और ताकतवर बनाया जाए। उनका मानना है कि चीन वैश्विक इतिहास में सबसे ज्यादा ताकतवर बनना चाहता है। शक्ति सिन्हा ने साल 2049 को जिनपिंग का मास्टर प्लान करार दिया है।

भारत सपने में सबसे बड़ी बाधा
उनका कहना है कि भारत उसकी राह में सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे चीन के महात्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट को लेकर सबसे पहले भारत ने खतरे की घंटी बजाई थी। भारत में मजबूत होता लोकतंत्र भी चीन के लिए खतरा है। भारत की तरफ से एलएसी पर सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाया गया है और इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण कार्य में तेजी आई है। चीन, भारत के इन्हीं कदमों से खासे चिंतित है। यही वजह है कि चीन अब सीमा पर आक्रामक व्यवहार कर रहा है। सिन्हा ने कहा है कि जहां तक लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल की बात है तो सभी चीजें पहले से निर्धारित हैं। सीमा पर दोनों तरफ की सेनाओं के लिए भी प्रोटोकॉल है। लेकिन चूंकि चीन की आदत क्षेत्र हड़पने की रही है कि इस वजह से बार-बार सीमा पर आक्रामक प्रयास किए जाते हैं।

दूसरे देशों पर कब्जा करने की नीति
उन्होंने कहा कि सन् 1950 से चीन की यही नीति रही है कि भारत को आगे न बढ़ने दिया जाए। अगर साल 1962 की बात छोड़ दें तो 1967 में भारत की सेना ने उन्हें सबक सिखाया था। गलवान वैली पर चीन की तरफ से दावा करने और पीएम मोदी द्वारा किसी भी तरह के अतिक्रमण से इनकार किए जाने पर शक्ति सिन्हा ने कहा है कि पीएम मोदी के सर्वदलीय बैठक में दिए गए वक्तव्य का आधिकारिक वर्जन आने तक इंतजार करना चाहिए। यह समझना होगा कि उन्होंने क्या कहा है। लेकिन यह साफ है कि भारत अब चीन के सामने पीछे हटने को तैयार नहीं है। डोकलाम इस बात का सबूत है कि किस तरह स्थितियों को ठीक किया गया।

चीन ने फिर कहा गलवान पर उसका हक
शुक्रवार को चीनी विदेश मंत्रालय की तरफ से हुई डेली मीडिया ब्रीफिंग में प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा कि कई वर्षों से चीनी सेना के जवान इस हिस्से में गश्त करते आ रहे हैं। यह दावा चीन की तरफ से ऐसे समय किया गया है जब 24 घंटे पहले ही यानी गुरुवार को भारत की तरफ से गलवान घाटी पर चीनी दावे को नकार दिया गया था। प्रवक्ता झाओ लिजियान ने एक-एक करके गलवान घाटी में हुई हिंसा के बारे में मीडिया को बताया। उनके बयान को शुक्रवार देर रात भारत स्थित चीनी दूतावास की तरफ से वेबसाइट पर जारी किया गया था। मंगलवार को पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) की वेस्टर्न कमांड की तरफ से बयान जारी किया गया था। इस बयान में कहा गया था, 'गलवान नदी घाटी की संप्रभुता हमेशा से हमारी रही है।'












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