जब अपनी ही हार पर हंसने लगे थे वाजपेयी, कहा था- खुशी है कि मैंने मां-बेटे की बगावत को सड़क पर आने से रोका
जब अपनी ही हार पर हंसने लगे थे वाजपेयी, कहा था- खुशी है कि मैंने मां-बेटे की बगावत को सड़क पर आने से रोका
नई दिल्ली, 16 अगस्त: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आज मंगलवार 16 अगस्त को पुण्यतिथि है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दिल्ली में 'सदैव अटल' जाकर अटल बिहारी वाजपेयी श्रद्धांजलि दी। इनके अलावा पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा, राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल ने भी भारत रत्न वाजपेयी अटल बिहारी वाजपेयी को पुष्पांजलि अर्पित की है। इस मौके पर प्रार्थना सभा का भी आयोजन किया गया। बता दें कि 'सदैव अटल' वाजपेयी का स्मारक है।

2018 में अटल बिहारी वाजपेयी का हुआ था निधन
साल 2018 में आज ही के दिन 16 अगस्त को दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में लंबी बीमारी के बाद अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हो गया। अटल बिहारी वाजपेयी को 2015 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन से जुड़ी कई कहानियां चर्चित हैं। आज उनकी पुण्यतिथि पर लोग उनकी लिखी कविताओं और उनकी बातों को याद कर रहे हैं। तो आइए हम भी आपको उनसे जुड़ी कहानी बताते हैं।

जब चुनाव में हुए हार पर हंसने लगे थे वाजपेयी
पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन से जुड़ी कई चर्चित कहानियां हैं। ऐसा ही एक किस्सा है उस वक्त का जब वह अपनी चुनावी हार पर हंसने लगे थे। जी हां, ये बात 1984 की है। उस साल के लोकसभा चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी ग्वालियर सीट से बीजेपी के टिकट पर खड़े हुए थे। उनका मुकाबला कांग्रेस उम्मीदवार माधवराव सिंधिया से था। लेकिन वह चुनाव अटल बिहारी वाजपेयी हार गए थे। लेकिन हारने के बाद उन्हें कोई दुख नहीं हुआ, बल्कि खूब हंसे।

'अगर मैंने ग्वालियर से चुनाव नहीं लड़ा होता तो...'
अटल जी से इस हंसी का कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'मुझे अपनी हार का अफसोस नहीं है। मुझे खुशी है कि मैंने मां-बेटे की बगावत को सड़क पर आने से रोका। अगर मैंने ग्वालियर से चुनाव नहीं लड़ा होता तो राजमाता माधवराव सिंधिया के खिलाफ चुनाव लड़तीं। जो मैं बिल्कुल नहीं चाहता था कि ऐसा हो।"

अटल बिहारी वाजपेयी को बेटा मनाती थीं राजमाता
राजमाता विजया राजे सिंधिया अटल जी को 'धर्मपुत्र' मानती थीं। इस ग्वालियर की हार का जिक्र अटल बिहारी वाजपेयी ने 2005 में भी किया था। 2005 में एक साहित्य सभा में अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था, ग्वालियर में मेरी हार के पीछे इतिहास छिपा है, जो मेरे साथ चला जाएगा।''

राजमाता और वाजपेयी ने संघ में एक साथ किया था काम
दरअसल ग्वालियर के सिंधिया घराने की राजमाता विजया राजे सिंधिया और अटल बिहारी वाजपेयी ने संघ के समय से ही साथ काम किया था। विजया राजे सिंधिया अटलजी को अपना धर्मपुत्र मानती थीं। इसका जिक्र करते हुए वाजपेयी ने कहा था कि वह मां-बेटे ( राजमाता विजया राजे सिंधिया और उनके बेटे माधवराव सिंधिया) के बीच लड़ाई नहीं चाहते थे।












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