अटल जी ने बालूशाही क्यों नहीं खिलाई
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) शनिवार को अपने आवास पर आए गणमान्य लोगों को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने बालूशाही नहीं खिलाई। यह भी नहीं पूछा कि आपने मिष्ठान का भोग तो लगा लिया है। वे सबकी तरफ निर्विकार भाव से देख रहे थे जो उनसे मिलने आए थे। स्वास्थ्य कारणों के चलते वे अब इस स्थिति में नहीं थे कि अतिथियों का हाल-चाल पूछते।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कल राजधानी में अटल बिहारी बाजपेयी को भारत रत्न से सम्मानित किया। राष्ट्रपति ने परम्परा से हटकर बाजपेयी के निवास पर आयोजित एक सादे पर गरिमामय समारोह में उन्हें इस पुरस्कार से नवाजा।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति मो. हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, पूर्व राष्ट्रपति डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिहं, केंद्रीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह, मंत्रिमंडल में वरिष्ठ सहयोगी, कई मुख्यमंत्री, राजनैतिक दलों के नेता, श्री बाजपेयी परिवार के सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
जानकारों ने बताया कि हमेशा ठहाके लगाने वाले बाजपेयी जी शांत थे। किसी से कुछ कह नहीं रहे थे। इसके चलते वहां पर कुछ लोग निराश भी थे कि भारत की सार्वजिनक जीवन की इतनी शिखर विभूति कैसे अब शांत हो गई।












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