चुनाव के नतीजे तय करेंगे शीतकालिन सत्र की दशा और दिशा

विधानसभा चुनाव के नतीजे संसद के शीतकालीन सत्र की दशा और दिशा तय करेंगे। 12 दिनों तक चलने वाले इस सीतकालिन सत्र की शुरुआत हंगामेदार होनी तय है। जहां सत्ताधारी यूपीए सरकार संसदीय सत्र के लिए काफी भारी भरकम विधायी कामकाज का एजेंडा सूचीबद्ध किए हुए है तो वहीं विपक्ष इस सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग कर रहा है । शीतकालिन सत्र में जहां तेलगांना का मुद्दा अहम होगा तो विपक्षी दल सरकार पर चौतरफा हमले की तैयारी कर रहा है।
सत्र की शुरुआत से पहले आज लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। जिसमें सभी दलों को सत्र में सहयोग करने को कहा गया। वहीं सरकार ने कहा है कि महिला आरक्षण विधेयक और लोकपाल विधेयक उसके एजेंडे में शीर्ष पर हैं। दोनों ही विधेयक एक सदन में पास हो चुका है और दूसरे सदन में लंबित है। ऐसे में दोनों बिलों को पास कर यूपीए सरकार अपनी उपलब्धि में नए आयाम को जोड़ने का काम करेंगी तो व हीं विरोधी दल मंहगाई के मुद्दे पर सरकार को घेरने का मन पहले ही बना चुके है। ऐसे में सत्र के शुरुआत से ही हंगामेदार होने के आसार है।












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