सोची-समझी रणनीति के तहत बीजेपी आलाकमान ने अपने तीनों सीएम को दिया फ्री हैंड
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सियासी सरगर्मियां जोरों पर हैं। तीनों ही राज्यों में बीजेपी की सरकार है। पार्टी की कोशिश यही है कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र में सत्ता संभाल रही भारतीय जनता पार्टी अपने तीनों गढ़ को बचाना चाहेगी। यही वजह है कि तीनों ही राज्यों के लिए पार्टी की ओर से खास रणनीति बनाई गई। हालांकि आपको जानकर हैरानी होगी कि इन तीनों ही राज्यों में पार्टी की ओर से मुख्य रणनीतिकार कोई और नहीं तीनों राज्यों के मुख्यमंत्री ही रहे। चाहे मध्य प्रदेश हो या छत्तीसगढ़ या फिर राजस्थान जिस तरह से टिकटों का बंटवारा हुआ, उसमें बीजेपी आलाकमान की उपस्थिति तो जरूर रही, लेकिन तवज्जो तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को ही दी गई। 2014 के बाद से देश में हुए ज्यादातर चुनावों में बीजेपी की ओर से अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रतिनिधित्व पार्टी को मिला। हालांकि छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में उन पर ये निर्भरता एक तरह से कम होती नजर आई है।

MP, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में मुख्यमंत्रियों ने संभाली कमान
आपको थोड़ी हैरानी जरूर होगी लेकिन मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में जिस तरह से चुनावी रणनीति तैयार की गई और तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को खास तवज्जो दी गई, इसके पीछे पार्टी आलाकमान की सोची-समझी रणनीति है। अगर मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां बीजेपी 15 साल से लगातार सत्ता में है, ऐसे में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार भले ही सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही हो, बावजूद इसके पार्टी ने उनकी चुनावी रणनीति पर पूरा भरोसा जताया है। हालांकि चुनाव से पहले ऐसी खबरें थी कि केंद्रीय आलाकमान उनसे नाराज चल रहा है लेकिन चुनाव में हुए टिकट वितरण से साफ हो गया पार्टी को उनकी कद्दावर इमेज पर पूरा भरोसा है। यही वजह है कि चुनाव में उन्हें फ्री हैंड दिया गया।

मध्य प्रदेश में शिवराज तो छत्तीसगढ़ में रमन सिंह को मिला 'फ्री हैंड'
ऐसा ही हाल छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिला। यहां भी रमन सिंह के नेतृत्व में पार्टी पिछले 15 साल से सरकार में है। ऐसे बीजेपी आलाकमान ने रमन सिंह पर भरोसा जताया और चुनावी रणनीति तैयार करने में उन्हें पूरी छूट दी गई। चाहे टिकट वितरण, हो या फिर स्थानीय स्तर पर चुनावी गठबंधन, हर स्थिति में पार्टी ने रमन सिंह के साथ सहयोग किया। कुल मिलाकर देखें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों ने इस दौरान आलाकमान का भरोसा जीतने में कामयाबी हासिल की है। हालांकि राजस्थान की बात करें तो यहां समीकरण बदले हुए हैं।

राजस्थान में वसुंधरा राजे ने संभाली जिम्मेदारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राजस्थान में वसुंधरा राजे की स्थिति इस चुनाव काफी कमजोर बताई जा रही है। यही वजह है कि पार्टी आलाकमान और खास तौर से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने योजना बनाई कि वो प्रदेश में चुनावी रणनीति का प्रतिनिधित्व करें, हालांकि खबरों के मुताबिक राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सामने आ गई। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने सीधे तौर पर अलग रूख अख्तियार करते हुए अपने हिसाब से चुनावी रणनीति को आगे बढ़ाया। खुद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने वसुंधरा राजे के इस अंदाज का जिक्र अपने एक बयान में भी किया। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम से वसुंधरा राजे की इमेज जरूर मजबूत हुई है।

कितनी कामयाब होगी बीजेपी की ये चुनावी रणनीति?
फिलहाल तीनों ही राज्यों में जिस तरह से मुख्यमंत्रियों ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर पार्टी की निर्भरता जरूर कम हुई है। इससे पहले के चुनाव पर नजर डालें तो चाहे यूपी का विधानसभा चुनाव हो या फिर गुजरात का चुनाव हो, सभी जगह मोदी-शाह की जोड़ी ने चुनावी गणित बिठाया और नतीजे पार्टी के हक में गए। इसमें महाराष्ट्र, झारखंड, हरियाणा, उत्तराखंड, त्रिपुरा, मणिपुर समेत कई राज्यों में बीजेपी ने सरकार बनाने में कामयाबी हासिल की। इन सभी जीत का श्रेय मोदी-शाह की जोड़ी को दिया गया। हालांकि अब 2019 से पहले मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी बीजेपी अपनी पकड़ मजबूत रखना चाहती है, यही वजह है कि यहां भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह कई रैलियां करेंगे।












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