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राजस्थान, एमपी, छत्तीसगढ़ में मिलकर लड़ते BSP-कांग्रेस, तो क्या BJP को हरा देते? ये रहा सबूत

Assembly election results 2023: मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हार के बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं ने ईवीएम पर ठीकरा फोड़ा है। वहीं, विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के दलों का कहना है कि अगर कांग्रेस ने उनके साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा होता तो परिणाम अलग होते।

ऐसे में एक बहस इस बात को लेकर भी छिड़ी है कि कांग्रेस अगर मायावती की बहुजन समाज पार्टी के साथ मिलकर राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के चुनाव मैदान में उतरती तो उसे दलित वोटों का कितना फायदा होता? क्या कांग्रेस और बीएसपी गठबंधन में रहकर भाजपा को इन तीनों राज्यों में हरा देते?

assembly elections

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव नतीजे देखें तो साफ तौर पर नजर आता है कि आदिवासी वोटों के साथ-साथ दलित वोट भी बड़ी संख्या में भारतीय जनता पार्टी को मिले हैं। इन तीनों राज्यों में अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के लिए कुल 79 सीटें आरक्षित हैं। रविवार को जब चुनाव आयोग ने नतीजे जारी किए तो इनमें से 52 सीटें भारतीय जनता पार्टी और 26 सीटें कांग्रेस के खाते में गईं। एक सीट अन्य को मिली। यानी, कांग्रेस के मुकाबले एससी वर्ग की दोगुनी सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार जीते। 2018 के चुनाव में भाजपा को इनमें से 32 और कांग्रेस को 43 सीटें मिली थीं।

बीएसपी को कितना वोट शेयर मिला
अब बात करते हैं इन तीन राज्यों में बीएसपी के प्रदर्शन की। बीएसपी का बेस वोटर दलित है, लेकिन राजस्थान, मध्य प्रदेश या छत्तीसगढ़ में से किसी भी एससी रिजर्व सीट पर पार्टी के उम्मीदवार को जीत नहीं मिली। बात अगर वोट शेयर की करें, तो मध्य प्रदेश में बीएसपी को 3.40 फीसदी, राजस्थान में 1.82 फीसदी और छत्तीसगढ़ में 2.05 फीसदी वोट शेयर मिला। ऐसे में ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन तीनों राज्यों में अगर बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस मिलकर चुनाव मैदान में उतरते, तो भी भारतीय जनता पार्टी को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचा पाते।

मायावती कर चुकी हैं अकेले लड़ने का ऐलान
आपको बता दें कि बहुजन समाज पार्टी ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में अपने उम्मीदवार उतारे थे। लेकिन, केवल राजस्थान में ही बीएसपी के दो उम्मीदवार जीत दर्ज कर पाए। विधानसभा चुनाव से पहले ही मायावती ने ऐलान कर दिया था कि ना ही वो विपक्षी गठबंधन इंडिया का हिस्सा बनेंगी, और ना ही एनडीए के साथ जाएंगी। लोकसभा चुनाव को लेकर भी मायावती ने अकेले ही चुनाव में जाने का फैसला लिया है।

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