कोरोना पीड़ित ससुर को पीठ पर लादकर अस्पताल ले गई महिला, कहा- नहीं आया मदद को कोई आगे, पढ़ें दर्दनाक कहानी

कोरोना पीड़ित ससुर को पीठ पर लादकर अस्पताल ले गई महिला, कहा- नहीं आया मदद को कोई आगे, पढ़ें दर्दनाक कहानी

नई दिल्ली, 10 जून: असम के नगांव के राहा की रहने वाली 24 वर्षीय महिला निहारिका दास अपने 75 वर्षीय कोरोना संक्रमित ससुर थुलेश्वर दास को पीठ पर लादकर अस्पताल ले गई थीं। कोरोना संक्रमिक ससुर को पीठ पर लादकर ले जाती महिला निहारिका दास की तस्वीरें पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। कई लोग इस निहारिका की तारीफ कर रहे हैं। लेकिन इस तस्वीर के पीछे की असल कहानी कुछ और ही है। निहारिका दास का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि जो उनके साथ हुआ है, उससे किसी और को नहीं गुजरना पड़े। असल में निहारिका को अपने बुजुर्ग ससुर को पीठ पर लादकर इसलिए ले जाना पड़ा क्योंकि उनकी मदद करने को कोई भी आगे नहीं आया था। निहारिका के घर तक जाने वाली सड़क कच्ची है, इसलिए अस्पताल ले जाने के लिए गाड़ी भी नहीं पहुंच पाई थी। निहारिका का कहना है कि अपने ससुर को पीठ पर लादकर ले जाते वक्त वह अकेला और हारा हुआ महसूस कर रही थीं।

2 किमी तक ससुर को पीठ पर लादकर चली महिला

2 किमी तक ससुर को पीठ पर लादकर चली महिला

निहारिका के 75 वर्षीय ससुर थुलेश्वर दास, जो कि राहा के भाटीगांव में एक छोटी सी दुकान चलाते हैं, 2 जून 2021 को उनमें कोविड-19 के लक्षण दिखने शुरू हो गए थे। इसके बाद निहारिका उन्हें 2 किमी दूर तक पीठ पर लादकर ऑटो-रिक्शा तक पहुंची थीं। उसके बाद उनके ससुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचे।

निहारिका ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ''मेरे ससुर इतने कमजोर थे कि खड़े भी नहीं हो सकते थे। मेरे पति सिलीगुड़ी में काम पर गए थे, इसलिए मेरे पास उन्हें अपनी पीठ पर बिठाने और कुछ दूरी पर खड़ी गाड़ी में ले जाने के अलावा कोई और चारा नहीं था।'' निहारिका ने कहा कि उनके घर में उस वक्त सिर्फ एक 6 साल का बेटा था। निहारिका न कहा कि उसके घर तक जाने वाली सड़क चलने सही नहीं है, इसलिए ऑटो उनके दरवाजे तक नहीं पहुंच सका।

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    'मैंने मदद मांगी लेकिन कोई आगे नहीं आया...'

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    सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में निहारिका के ससुर की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उसके बाद अधिकारियों ने निहारिका को बताया कि उनके ससुर की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें 21 किमी दूर नागांव में एक कोविड अस्पताल ले जाना होगा।

    निहारिका ने कहा, ''नागांव के कोविड-19 अस्पताल ले जाना के लिए हमें एक और निजी वाहन को फोन करना पड़ा। कोई एम्बुलेंस या स्ट्रेचर नहीं था, इसलिए मुझे अपने ससुर को फिर से कार में ले जाने के लिए पीठ पर बिठाना पड़ा। लोग घूरते रहे, हमे दूर खड़े होकर लोग देख रहे थे लेकिन किसी ने मदद के लिए नहीं पूछा। मेरे ससुर लगभग बेहोश हो गए थे और मुझे उन्हें ले जाने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत ताकत लगी।"

    इसी वक्त किसी अज्ञान ने निहारिका की तस्वीर खींचकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी थी। निहारिका इस तस्वीर में गुलाबी रंग की साड़ी में दिख रही हैं और उसके ससुर उसकी पीठ पर। यह तस्वीर पिछले हफ्ते से सोशल मीडिया पर छाई हुई है।

    अपने ससुर को नहीं बचा सकी निहारिका

    अपने ससुर को नहीं बचा सकी निहारिका

    निहारिका ने कहा, जब मैं अस्पताल पहुंच गई तो वहां भी मुझे अपने ससुर को पीठ पर लादकर फिर से सीढ़ियों पर चढ़ना पड़ा। मैंने मदद मांगी लेकिन कोई उपलब्ध नहीं था। मुझे लगता है कि मैंने उस दिन कुल मिलाकर 2 किमी तक अपने ससुर को पीठ पर बिठाकर चला है।''

    निहारिका ने वायरल तस्वीर पर कहा, ''बेशक, मुझे खुशी है कि लोगों को तस्वीर देखकर अच्छा लगा। फोटो के माध्यम से मैं केवल यही संदेश देना चाहती हूं कि लोग एक-दूसरे की मदद करें। चाहे वह आपके माता-पिता हों, ससुराल वाले हों या फिर अजनबी हों। अकेलापन और पूरी तरह टूटा हुआ महसूस करता है।

    हालांकि निहारिका के ससुर की हालत बिगड़ने पर 5 जून को गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उन्हें स्थानांतरित कर दिया गया था लेकिन सोमवार (07 जून) की रात उन्होंने वायरस के कारण दम तोड़ दिया।

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