Assam Government: असम में एनआरसी आवेदन को लेकर क्यों मचा है बवाल?
असम सरकार के हालिया फैसले ने विवाद को जन्म दे दिया है। उन्होंने आधार कार्ड प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) आवेदन को अनिवार्य बनाने का फैसला किया है। इस कदम की विपक्षी दलों ने आलोचना की है।
उनका कहना है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व में राज्य 'Banana republic' में तब्दील हो रहा है।

असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार, इस निर्णय का उद्देश्य बांग्लादेश से नागरिकों द्वारा घुसपैठ के प्रयासों को संबोधित करना है। हालांकि एनआरसी को आधार से जोड़ने के बारे में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
आधार-एनआरसी लिंक पर विपक्ष की चिंताएं
असम से टीएमसी की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने इस फैसले की आलोचना की। उन्होंने बताया कि एनआरसी को भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा आधिकारिक रूप से अधिसूचित नहीं किया गया है। देव ने सवाल उठाया कि इसे आधार जारी करने के आधार के रूप में कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि एक वर्ष में 182 दिनों तक भारत में रहने वाले गैर-नागरिक भी आधार कार्ड प्राप्त कर सकते हैं।
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने असम में फर्जी लाभार्थियों के बारे में चिंता व्यक्त की। उन्होंने सरकारी आंकड़ों का हवाला दिया जिसमें दिखाया गया है कि पीएम किसान जैसी योजनाओं पर सार्वजनिक धन की बड़ी बर्बादी की गई है। गोगोई ने आरोप लगाया कि नागरिकों द्वारा कर और शुल्क चुकाने के बावजूद धन का दुरुपयोग किया जा रहा है और भाजपा सदस्यों की जेब में डाला जा रहा है।












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