हाथी को लेकर असम और तमिलनाडु सरकार में बढ़ा विवाद, मामला पहुंचा कोर्ट
गुवाहाटी, 14 सितंबर: असम और तमिलनाडु की सरकारों के बीच पट्टे पर लिए गए हाथियों विशेषकर मंदिर हाथी जोयमाला को लेकर विवाद गहरा गया है। हाथी का मामला अब कोर्ट पहुंच गया है। तमिलनाडु ने असम से लाए गए जयमाला नामक हाथी को वापस देने से इनकार कर दिया है। तमिलनाडु द्वारा हाथियों को वापस करने से इनकार करने के बाद असम सरकार ने आज गुवाहाटी उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है।

वहीं अब केंद्र सरकार ने तमिलनाडु के इस दावे का समर्थन किया कि जयमाला की अच्छी देखभाल की जा रही है। पर्यावरण और वन मंत्रालय ने आज ट्वीट करते हुए कहा कि वर्तमान टीम जंबो की अच्छी देखभाल कर रही है और हाथी के साथ हो रही मारपीट के वायरल वीडियो पुराने हैं। दोनों राज्यों के बीच विवाद पशु अधिकार समूह पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) द्वारा एक वीडियो जारी करने के बाद खड़ा हो गया है।
इस संबंध में तमिलनाडु के मुख्य वन संरक्षक श्रीनिवास रेड्डी ने बताया कि असम से चार विशेषज्ञों की एक टीम पहुंची है, उनसे वंडालूर वन्यजीव पार्क में मुलाकात हुई है। उन्होंने कहा कि हम हाथी को वापस नहीं कर सकते हैं। हाथी कई साल पहले आया था। रेड्डी ने कहा कि हाथी को प्रताड़ित या गाली देने का जो वीडियो वायरल हुआ है वह पुराना है।
बता दें कि इससे पहले सोशल मीडिया पर हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें तमिलनाडु के नागरकोइल जिले में एक व्यक्ति को हाथी को प्रताड़ित करते हुए देखा जा सकता है। जिस पर लोगों ने काफी गुस्सा जाहिर किया था। वहीं असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पिछले सप्ताह इस मामले पर चर्चा के लिए वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की थी।
जिसके बाद असम सरकार के प्रतिनिधियों ने जयमाला की जांच के लिए तमिलनाडु का दौरा किया, लेकिन तमिलनाडु ने असम से आई टीम को हाथी को देखने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। असम के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एमके यादव ने कहा था कि तमिलनाडु सरकार के असहयोग के कारण जयमाला को राज्य में वापस नहीं लाया जा सका, इसलिए असम सरकार ने इस मामले में कानूनी सहारा लेने के खिलाफ अदालत जाने का फैसला किया है।












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