Assam Election 2026: भूपेन बोरा के BJP में जाने से कांग्रेस बैकफुट पर, चुनाव को लेकर क्या है प्लान बी?
Assam Election 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा (Bhupen Bora) ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। 16 फरवरी को कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद उनके इस कदम ने राज्य की सियासत में हलचल बढ़ा दी है। हालांकि राहत की बात यह रही कि उनके साथ कोई और बड़ा नेता या भारी संख्या में कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल नहीं हुए।
क्या खोया कांग्रेस ने? (Bhupen Bora Impact)
भूपेन बोरा का कांग्रेस से तीन दशक लंबा रिश्ता रहा है। एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस से राजनीति शुरू कर उन्होंने 2006 और 2011 में बिहपुरिया सीट से जीत दर्ज की। पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई (Tarun Gogoi) ने उन्हें संसदीय सचिव बनाया था। 2016 और 2021 में हार के बावजूद 2021 के चुनाव बाद उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई।

उनकी सबसे बड़ी ताकत सामाजिक समीकरण मानी जाती थी। बोरा कूच राजवंशी समुदाय से आते हैं, जिसकी असम के कई जिलों में प्रभावी मौजूदगी है। ब्रह्मपुत्र घाटी के लखीमपुर, तेजपुर, धेमाजी, दरंग और बरपेटा जैसे इलाकों में इस समाज का असर है। यही वजह है कि उनके बीजेपी में जाने से कांग्रेस को सामाजिक मोर्चे पर चुनौती बढ़ी है।
BJP का सियासी संदेश
इस्तीफे के तुरंत बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) का उनके घर पहुंचना सियासी संकेत माना गया। हिमंत खुद 2015 तक कांग्रेस में थे और बोरा से उनके पुराने रिश्ते रहे हैं। कांग्रेस अब यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि बोरा पहले से ही बीजेपी नेतृत्व के संपर्क में थे और पार्टी रणनीति साझा कर रहे थे।
अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व संकट
सूत्र बताते हैं कि प्रभारी जितेंद्र सिंह समय रहते भूपेन बोरा की नाराजगी दूर नहीं कर पाए। प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई (Gaurav Gogoi) और सांसद रकीबुल हुसैन (Rakibul Hussain) के साथ तालमेल को लेकर मतभेद सामने आए। बोरा ने इस्तीफे के बाद कहा कि गौरव गोगोई केवल चेहरा हैं और असल संचालन कोई और कर रहा है।
कांग्रेस सामाजिक संतुलन साधने के लिए रिपुन बोरा पर भरोसा जता सकती है, जो उसी समुदाय से आते हैं और पहले प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। हालांकि वे भी एक बार तृणमूल में जाकर फिर वापसी कर चुके हैं।
प्रियंका गांधी की एंट्री (Priyanka Gandhi Campaign)
चुनावी कमान अब प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) ने संभाल ली है। गुवाहाटी पहुंचकर उन्होंने ब्लॉक अध्यक्षों से बैठक की और भरोसा जताया कि नेता के जाने से संगठन कमजोर नहीं होगा। उन्होंने बीजेपी सरकार के खिलाफ 20 सूत्रीय आरोप पत्र जारी किया और कहा कि पार्टी पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी।
कामाख्या मंदिर में दर्शन के बाद उन्होंने कहा कि वे असम की संस्कृति और सभ्यता की रक्षा के लिए आशीर्वाद लेने आई हैं। गठबंधन के सवाल पर उन्होंने संकेत दिया कि समय आने पर तस्वीर साफ होगी।
आगे की राह?
126 सदस्यीय असम विधानसभा के चुनाव मार्च अप्रैल में संभावित हैं। कांग्रेस अब भूपेन बोरा प्रकरण को पीछे छोड़ बीजेपी सरकार की कथित नाकामियों और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आक्रामक रुख अपना रही है। उम्मीदवारों के चयन और गठबंधन रणनीति पर मंथन जारी है।
सवाल यही है कि क्या कांग्रेस सामाजिक समीकरण और संगठनात्मक चुनौतियों को साधकर मुकाबले में दम दिखा पाएगी, या भूपेन बोरा का जाना चुनावी समीकरण बदल देगा। आने वाले हफ्ते असम की राजनीति की दिशा तय करेंगे।
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