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Assam Chunav से पहले भाजपा को तगड़ा झटका, मौजूदा मंत्री कांग्रेस में हुईं शामिल, कौन है ये महिला नेता?

Assam Chunav 2026: असम के आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। भाजपा की मौजूदा मंत्री नंदिता गोरलोसा ने रविवार रात कांग्रेस का दामन थाम लिया। मौजूदा मंत्री नंदिता ने नामांकन सामाप्‍त होने के ठीक पहले बगावत की। नंदिता असम की हाफलोंग (एसटी) निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ेंगी।

गोरलोसा ने असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव निर्मल लंगथसा समेत वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। कांग्रेस ने अपनी पांचवीं सूची में हाफलोंग सीट से पहले निर्मल लंगथसा को उम्मीदवार नामित किया था, लेकिन गोरलोसा के शामिल होते ही पार्टी ने उन्हें हटाकर गोरलोसा को उम्मीदवार बना दिया।

Assam Chunav 2026

नामांकन की अंतिम तिथि से ठीक पहले हुए इस दलबदल को राज्य की चुनावी राजनीति में एक महत्वपूर्ण अंतिम-मिनट का बदलाव माना जा रहा है।

कांग्रेस ने हाफलोंग सीट से उम्‍मीदवार घोषित किया

कांग्रेस ने एक बयान जारी कर कहा, "हम नंदिता गोरलोसा के कांग्रेस पार्टी में शामिल होने और हाफलोंग सीट से उन्हें अपना उम्मीदवार घोषित करने पर खुश हैं।" पार्टी ने यह भी बताया कि श्री लंगथसा ने "व्यापक जनहित में स्वेच्छा से अपनी सीट खाली की है।" यह बदलाव नामांकन की अंतिम तिथि सोमवार से ठीक पहले हुआ।

भाजपा से क्‍यों नंदिता ने की बगावत?

हाफलोंग की मौजूदा विधायक गोरलोसा को भाजपा ने टिकट नहीं दिया। 2021 में चुनी गईं गोरलोसा ने राज्य कैबिनेट में खनन, खनिज और आदिवासी आस्था जैसे विभाग संभाले थे। भाजपा ने कई मौजूदा विधायकों का टिकट काटते हुए इस सीट से रूपाली लंगथसा को मैदान में उतारा है।

बैठकों में नहीं हुईं थीं शामिल

भाजपा की 19 मार्च को उम्मीदवार सूची जारी होते ही गोरलोसा ने प्रतिक्रिया दी थी। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा सहित वरिष्ठ नेताओं ने उनसे संपर्क साधा। सरमा ने रविवार को दीमा हसाओ का दौरा किया, लेकिन हाफलोंग के भाजपा नेताओं के मुताबिक, गोरलोसा बैठकों में अनुपस्थित रहीं।

नंदिता गोरलोसा कौन हैं?

दीमा हसाओ की निवासी नंदिता गोरलोसा राज्य मंत्रिमंडल में खान एवं खनिज तथा आदिवासी आस्था एवं संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभाल चुकी हैं। उनका जन्म 13 मई, 1977 को हाफलोंग में हुआ था। वह इस क्षेत्र में एक प्रमुख राजनीतिक चेहरा बनकर उभरी हैं और उन्होंने निर्वाचन क्षेत्र के आदिवासी समुदायों में अपना मजबूत जनाधार बनाया है। उन्होंने 2021 में हाफलोंग (ST) निर्वाचन क्षेत्र से विधायक के रूप में जीत हासिल की थी। हाल ही में, भाजपा ने उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव के लिए टिकट नहीं दिया, जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। भाजपा ने कई मौजूदा विधायकों को सूची से हटाने की अपनी रणनीति के तहत हाफलोंग सीट से नवोदित रूपाली लांगथासा को उम्मीदवार बनाया था।

भाजपा को क्‍या होगा नुकसान?

भाजपा छोड़ने के तुरंत बाद, गोरलोसा कांग्रेस में शामिल हो गईं और अब वह पार्टी के टिकट पर उसी हाफलोंग विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने जा रही हैं। उनके आगमन से कांग्रेस को अपने पूर्व घोषित उम्मीदवार पर पुनर्विचार करना पड़ा। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यह बदलाव इस महत्वपूर्ण आदिवासी सीट पर पार्टी की चुनावी संभावनाओं को मजबूती देगा। 9 अप्रैल, 2026 को नामांकन की अंतिम तिथि से ठीक पहले हुए इस दलबदल को राज्य की चुनावी राजनीति में एक महत्वपूर्ण अंतिम-मिनट का बदलाव माना जा रहा है।

भाजपा मंत्री के इस्‍तीफे पर क्‍या बोले सरमा?

गुवाहाटी में रविवार देर रात पत्रकारों से बात करते हुए, सरमा ने पहले कहा था कि गोरलोसा भाजपा नहीं छोड़ेंगी। हालांकि, उनके पाला बदलने की जानकारी मिलने पर उन्होंने अपना बयान संशोधित किया। सरमा ने कहा, "मैंने उनसे बात की थी और वह संतुष्ट लग रही थीं। कांग्रेस ने हाफलोंग से अपना उम्मीदवार पहले ही घोषित कर दिया था। मुझे नहीं पता कि वह उस पार्टी में क्यों शामिल हो रही हैं।"

टिकट ना मिलने से नाराज इन दो विधायकों ने भी की बगावत

यह अकेला गोरलोसा का मामला नहीं। बराक घाटी में भी भाजपा ने तीन मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं दिए। निहार रंजन दास ने इस्तीफा दिया, पर सीएम से मिलकर चुनाव न लड़ने का फैसला किया। दूसरी ओर, पूर्व भाजपा विधायक अमर चंद जैन कांग्रेस में शामिल हुए और कटिगोरा से उम्मीदवार बने। भाजपा ने कटिगोरा में पूर्व कांग्रेस विधायक कमलाख्या दे पुरकायस्थ को उतारा है, जिस पर मुख्यमंत्री सरमा ने जीत का भरोसा जताया है। सभी 126 सीटों के लिए विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल को होंगे।

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