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असम विधानसभा चुनाव : पहले चरण की 47 में से 27 सीटें क्या बरकरार रख पाएगी भाजपा ?

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असम विधानसभा चुनाव : पहले चरण की 47 में से 27 सीटें क्या बरकरार रख पाएगी भाजपा ?
    Assam Election 2021: Amit Shah बोले- Love और Land Jihad के खिलाफ कानून लाएगी सरकार | वनइंडिया हिंदी

    दिसपुर। असम विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 47 सीटों पर 27 मार्च को वोटिंग है। इन 47 सीटों में से 35 सीटें भाजपा-अगप गठबंधन की हैं। 2016 में इन 47 में से 27 पर भाजपा और 8 पर अगप को जीत मिली थी। पहले चरण की 42 विधानसभा सीटें ऊपरी असम के 11 जिलों में आती हैं। बाकी पांच विधानसभा सीटें मध्य असम की हैं। पहले चरण के चुनाव में भाजपा और अगप पर अपनी सीटों का बरकरार रखने की चुनौती है। इस दौर के चुनाव पर ही भाजपा का भविष्य टिका है। भाजपा के 24 विधायक और अगप के 6 विधायक फिर मैदान में हैं। बाकी नये चेहरे हैं। दूसरी तरफ पिछले चुनाव में कांग्रेस को 9 और एआइयूडीएफ को एक सीट मिली थी। 2021 में कांग्रेस के 6 और एआइयूटीएफ के एक विधायक फिर मैदान में हैं। शेष नये उम्मीदवार हैं। 2016 में भाजपा के उदय के पहले ऊपरी असम को कांग्रेस का गढ़ कहा जाता था। कांग्रेस ने 2006 में इन 47 सीटों में से 27 पर जीत हसिल की थी। 2011 में कांग्रेस ने 38 सीटें जीत कर बाकी दलों को बहुत पीछे छोड़ दिया थ। लेकिन 2016 में तस्वीर बदल गयी। अब कांग्रेस छह दलों के साथ गठबंधन कर भाजपा,अगप और यूपीपीएल के एलायंस को चुनौती दे रही है। पहले चरण के प्रमुख उम्मीदवारों पर डालते हैं एक नजर ।

    सर्वानंद सोनोवाल (मुख्यमंत्री)

    सर्वानंद सोनोवाल (मुख्यमंत्री)

    मुख्यमंत्री और भाजपा उम्मीदवार सर्वानंद सोनोवाल माजुली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। माजुली अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व सीट है। सोनोवाल असम के दूसरे आदिवासी मुख्यमंत्री हैं। पहले वे अगप में थे लेकिन 2011 में वे भाजपा में शामिल हो गये थे। वे दो बार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। पिछला चुनाव उन्होंने यहीं से जीता था। भाजपा ने 2016 में केन्द्रीय खेल राज्य मंत्री रहते सर्वानंद सोनोवाल को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया था। मुख्यमंत्री बनने से पहले वे लखीमपुर से सांसद थे। सर्वानंद का मुकाबला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री राजीव लोचन पेगू से है। पिछले चुनाव में उन्होंने राजीव लोचन को करीब 18 हजार वोटों से हराया था। राजीव लोचन इस हार से पहले तीन बार इस सीट पर जीत चुके थे। इस बार भाजपा ने रणनीति के तहत किसी नेता को सीएम के रूप में प्रोजेक्ट नहीं किया है।

    अखिल गोगोई ( जेल से लड़ रहे चुनाव)

    अखिल गोगोई ( जेल से लड़ रहे चुनाव)

    अखिल गोगई ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में जोरदार आंदोलन चलाया था। दिसम्बर 2019 में अखिल गोगोई को सीएए विरोधी आंदोलन को हिंसक बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वे जेल से चुनाव लड़ रहे हैं। गोगोई ने राइजोर दल की स्थापना की है। वे जेल से ही राइजोर दल के बैनर तले शिवसागर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मान्यता मिली है। अखिल गोगोई के पक्ष में उनकी 84 वर्षीय मां ने चुनाव प्रचार किया है। उन्होंने कहा है कि मैंने अपने बेटे की आजादी के लिए जनता से आंचल फैला कर वोट मांगा है। अखिल के लिए सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर और मेग्सेसे पुरस्कार विजेता संदीप पांडेय ने भी चुनाव प्रचार किया है। अभी शिवसागर सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। प्रणब कुमार गोगोई ने इस सीट पर 2011 और 2016 में जीत हासिल की थी। लेकिन फरवरी 2020 में प्रणब गोगई की मौत से यह सीट रिक्त हो गयी थी। 2021 के चुनाव में कांग्रेस ने यहां से शुभ्रमित्रा गोगोई को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा से सुरभी राजकुंअरी लड़ रही हैं। सुरभी 2016 में उपविजेता रहीं थीं।

    रिपुन बोरा (प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष)

    रिपुन बोरा (प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष)

    रिपुन बोरा असम कांग्रेस के अध्यक्ष हैं और वे गोहपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। रिपुन बोरा राज्यसभा सांसद भी हैं। यह सीट भाजपा की है। 2016 के चुनाव में भाजपा के उत्पल बोरा ने कांग्रेस की मोनिका बोरा को हराया था। मोनिका बोरा रिपुन बोरा की पत्नी हैं। यानी इस बार कांग्रेस ने पत्नी के बदले पति को चुनाव मैदान में उतारा है। इस सीट पर रिपुन बोरा की सीटिंग विधायक उत्पल बोरा से सीधी लड़ाई है। रिपुन बोरा को कांग्रेस का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता है। उनकी वजह से ही कांग्रेस का छह अन्य दलों के साथ चुनावी गठबंधन हो सका। वे कांग्रेस के सबसे मजबूत उम्मीदवारों में एक हैं और उन्हें भाजपा से यह सीट छीनने के लिए ही मैदान में उतारा गया है।

    अतुल बोरा (अगप अध्यक्ष)

    अतुल बोरा (अगप अध्यक्ष)

    अतुल बोर असम गण परिषद के अध्यक्ष हैं। अगप का भाजपा से गठबंधन है। अतुल बोकाखाट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। यह क्षेत्र गोलाघाट जिले में आता है। उन्होंने 2016 में इस सीट पर चुनाव जीता था। इस चुनाव क्षेत्र को कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। अतुल पहले गैरकांग्रेसी नेता रहे जिन्हें इस सीट पर जीत हासिल हुई। पिछली बार उन्होंने कांग्रेस के सीटिंग विधायक अरुण फुकन को हराया था। इस बार कांग्रेस ने यह सीट अपनी साझीदार पार्टी आंचलिक गण मोर्चा को दे दी है। आंचलिक गण मोर्चा के प्रणब डोली यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। अतुल और प्रणब के बीच मुख्य मुकाबला है। अतुल बोरा 1996 में पहली बार गोलघाट विधानसभा सीट से विधायक चुने गये थे।

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    लुरिन ज्योति गोगोई

    लुरिन ज्योति गोगोई

    लुरिन ज्योति गोगोई असम के युवा नेता हैं। वे ऑल असम स्टूडेंट यूनियन के महासचिव रह चुके हैं। सीएए विरोधी आंदोलन से उन्हें बड़ी पहचान मिली है। वे क्षेत्रीय दल, असम जातीय परिषद के अध्यक्ष हैं। वे दो सीटों से विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। डिब्रूगढ़ जिले की दुलियाजान विधानसभा सीट और नहरकटिया विधानसभा सीट से वे किस्मत आजमा रहे हैं। दुलियाजान सीट पर उनका मुकाबला भाजपा के तेरोस गोवाला और कांग्रेस के ध्रुव गोगोई से है। नहरकटिया सीट पर लुरिन की लड़ाई भाजपा के तरंग गोगोई और कांग्रेस के प्रणिति फुकन से है।

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    English summary
    Assam Assembly elections 2021: Will BJP be able to retain 27 out of 47 seats in the first phase?
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