मां के निधन के दो घंटे बाद ही कोरोना से लड़ने काम पर लौटा ये अफसर, बोला- 'मातृभूमि खतरे में हैं'

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में आपकी और हमारी मजबूत इच्छा शक्ति ही इस महामारी पर विजय दिला सकती है। देश से ऐसे कई उदाहरण सामने भी आ रहे हैं जिनमें लोग अपने परिवार के बारे में सोचे बिना सर्वप्रथम इस महामारी को हराने में लगे हुए हैं। मध्य प्रदेश में नगर निगम में सीवेज प्रभारी के पद पर कार्यरत अशरफ अली ने भी कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया है जिसके बारे में आप सुनेंगे तो हैरान रह जाएंगे। दरअसल, कोरोना संकट के बीच अशरफ अली की मां का निधन हो गया था। लेकिन इस समय भी उन्होंने अपने परिवार के बारे में ना सोचते हुए अपना कर्तव्य पूरा किया।

कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं अशरफ

कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं अशरफ

देशभर में पैर पसार चुका कोरोना वायरस अब भारत के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में कुल 918 कोरोना के मामले सामने आ चुके हैं और 19 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में कोरोना वायरस से जंग लड़ रहे अशरफ अली ने एक नई मिसाल पेश की है। अशरफ की मां नूर जहां बेगम का गुरुवार को उम्र संबंधी बिमारियों को चलते इंतकाल गया था। घर में जनाजा तैयार हो चुका था और कंधा देने के लिए बेटे अशरफ अली का इंतजार था। ऐसी परिस्थिति में भी अशरफ मानवता का सबसे बड़ा फर्ज अदा करने में लगे थे।

नगर निगम में सीवेज प्रभारी हैं अशरफ

नगर निगम में सीवेज प्रभारी हैं अशरफ

दोपहर को करोंद स्थित निवास पर अशरफ अली का इंतजार हो रहा था ताकि वह आएं और अपनी मां के जनाजे को कंधा दे सकें। जिस समय उन्हें अपने घर पर होना चाहिए था उस समय भी अशरफ देश को कोरोना वायरस से बचाने में लगे हुए थे। अशरफ अली नगर निगम में सीवेज प्रभारी के पद पर कार्यरत है। इन्हें 12 सीवेज मशीनों में स्प्रिंकल्स से सैनिटाइजेशन की जिम्मेदारी मिली है। मां की सूचना मिलने के बाद भी वह कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक के दौरान पहुंचे।

घर वालों ने भी समझा अशरफ के काम का फर्ज

घर वालों ने भी समझा अशरफ के काम का फर्ज

काम पर लगे अशरफ अली को उनके मां के बारे में निगम के वरिष्ठ अधिकारियों से जानकारी मिली थी। अशरफ को तत्काल छुट्टी भी दे दी गई थी, अधिकारियों ने अशरफ की जिम्मेदारी भी अन्य अधिकारी को देने की बात कह चुके थे। हालांकि अशरफ ने ने कहा कि सैनेटाइजेशन के लिए स्लम एरिया के लिए टीम रवाना हो चुकी है। उनके इस फैसले से अधिकारी भी चकित रह गए। अशरफ को लगा कि वह जब घर पहुंचेंगे तो उन्हें अपने रिस्तेदारों और घर वालों को जवाब देना होगा लेकिन घर के गमगीन माहौल में लोग काम के फर्ज को समझ चुके थे। इस दौरान लोगों ने अशरफ के लिए दुआ करते हुए कहा, उन्होंने इंसानियत की इबादत की है।

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