भारत के मुसलमानों से पूछता हूं, धर्मनिरपेक्षता से क्या मिला, मस्जिद गिराने वालों को सजा हुई: ओवैसी
भारत के मुसलमानों से पूछता हूं, धर्मनिरपेक्षता से क्या मिला, मस्जिद गिराने वालों को सजा हुई: ओवैसी
नई दिल्ली, 12 दिसंबर: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भारत के मुसलमानों को राजनीतिक धर्मनिरपेक्षता में न फंसने की सलाह दी है। असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार (11 दिसंबर) को तिरंगा यात्रा के दौरान मुंबई में रैली को संबोधित किया। इस दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ''मैं भारत के मुसलमानों से पूछना चाहता हूं कि हमें धर्मनिरपेक्षता से क्या मिला? क्या हमें धर्मनिरपेक्षता से आरक्षण मिला? क्या मस्जिद गिराने वाले आरोपियों को सजा मिली? नहीं, किसी को कुछ नहीं मिला...।'' असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ''मैं संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करता हूं, राजनीतिक धर्मनिरपेक्षता में नहीं।''
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असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ''सरकारी आंकड़े बताते हैं कि महाराष्ट्र में सिर्फ 22 फीसदी मुस्लिम ही प्राथमिक स्कूलों में प्रवेश ले पाते हैं। वहीं मिडिल स्कूल में 13 प्रतिशत छात्र। स्नातक में मुस्लिम 4.9 फीसदी ही प्रवेश ले पाते हैं। इतना ही महाराष्ट्र में 83 फीसदी मुस्लिम भूमिहीन हैं।''
असदुद्दीन ओवैसी ने शिवसेना और बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर सरकार मुसलमानों को आरक्षण देती तो मुस्लिम बच्चों को भी शिक्षा मिलती। इस देश में फैसला लेने की प्रक्रिया में हमारी हिस्सेदारी नहीं है और ना ही अधिकार है।
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष शब्द से मुस्लिमों का नुकसान हुआ है। इसलिए हमें इसमें फंसने की जरूरत नहीं है।
असदुद्दीन ओवैसी ने यह भी कहा कि कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना का दिल सिर्फ मराठाओं के लिए धड़कता है। इसलिए महाराष्ट्र में मराठाओं का जीवन स्तर मुसलमानों से कहीं अधिक बेहतर है। महाराष्ट्र की सरकार पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने कहा, इन लोगों ने सत्ता में आने के लिए एक-दूसरे से हाथ मिला लिया। इसके बाद मुस्लिम समुदाय को शिक्षा और रोजगार में 5 प्रतिशत आरक्षण देने का वादा भी भूल गए हैं।
असदुद्दीन ओवैसी ने यह भी कहा है कि कांग्रेस और एनसीपी आरोप लगाते हैं कि एआईएमआईएम धर्मनिरपेक्ष मतों में बंटवारा कराती है। आप ही बताइए क्या शिवसेना धर्मनिरपेक्ष है? नहीं, जब उद्धव ठाकरे कहते हैं कि वह शिवसैनिकों द्वारा बाबरी मस्जिद को तोड़े जाने पर गर्व महसूस करते हैं तो एनसीपी और कांग्रेस चुप क्यों रहते थे।












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