8 मई तक कोरोना राहत के रूप भारत को दूसरे देशों से क्या-क्या चीजें मिलीं, सरकार की पूरी लिस्ट देखिए
नई दिल्ली, 9 मई: कोरोना संकट के दौरान भारत की मदद के लिए बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय मदद भी पहुंच रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को उन सभी सहायताओं के बारे में जानकारी दी है, जो 27 अप्रैल से 8 मई के बीच विदेशी सहायता के तौर पर या तो भारत पहुंच चुके हैं या डिस्पैच किए जा चुके हैं। इसमें करीब 7 हजार ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और करीब 5 हजार वेटिंलेटर समेत 19 ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट भी शामिल हैं। बता दें कि देश इस समय कोरोना के खिलाफ जंग में सबसे ज्यादा मरीजों तक ऑक्सीजन सप्लाई की परेशानी से ही जूझ रहा है। ऐसे में ये मदद कई जगह बहुत ही सही समय पर मिली सहायता साबित हो रहे हैं।

विदेशों से मदद के तौर मिली सामानों की लिस्ट
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया है कि भारत सरकार को अंतरराष्ट्रीय अनुदान और सहायता मिल रही है, जिसमें कोविड-19 रिलीफ के तौर पर मेडिकल सप्लाई और उपकरण भी शामिल हैं। भेजने वालों में दूसरे देशों की सरकारें और संगठन भी शामिल हैं। मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है, 'कुल मिलाकर 6,738 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और 3,856 ऑक्सीजन सिलेंडर,16 ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट, 4,668 वेंटिलेटर/बीआई-पीएपी और करीब 3 लाख रेमडेसिविर वायल 27 अप्रैल से 8 मई के बीच या तो प्राप्त हो गए हैं या डिस्पैच किए जा चुके हैं।' 8 मई को कनाडा, थाईलैंड, नीदरलैंड,ऑस्ट्रिया, चेक रिपब्लिक, इजरायल, यूएसए, जापान, मलेशिया, यूएस (जीआईएलईएडी), यूएस (सेल्सफोर्स) और थाईलैंड के भारतीय समुदाय से 2,404 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, 25,000 रेमडेसिविर वायल, 218 वेंटिलेटर और 6,92,208 टेस्टिंग किट मिले हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय की निगरानी में हो रहा है आवंटन
यही नहीं स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि जो भी मदद पहुंच रही है, उसे तुरंत प्रभावी तौर पर राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और संस्थाओं को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की निगरानी में भेजने की प्रक्रिया लगातार चल रही है। मंत्रालय ने कहा है, 'अनुदान, सहायता और दान के रूप में विदेशी सहायता सामग्रियों को प्राप्त करने और आवंटित करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में कोऑर्डिनेशन के लिए एक डेडिकेटेड कोऑर्डिनेशन सेल बनाई गई है। इस सेल ने 26 अप्रैल से ही काम करना शुरू कर दिया है। इसके लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसेड्योर तैयार की गई है और स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2 मई से उसे लागू कर दिया है।'












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