Arvind Kejriwal News: केजरीवाल के जेल से छूटने से चुनावों पर क्या होगा असर, 'इंडिया' को कितना फायदा?
Arvind Kejriwal Bail News: दिल्ली में मतदान के ठीक 15 दिन पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने विपक्षी इंडिया ब्लॉक का उत्साह बढ़ा दिया है। आम आदमी पार्टी के चीफ को भले ही 21 दिन की अंतरिम जमानत मिली है, लेकिन विपक्ष चुनावों में इसे भुनाने की पूरी तैयारी कर चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को सिर्फ चुनाव प्रचार से जुड़े कार्यों के लिए ही अंतरिम जमानत दी है। वह सातवें चरण या 1 जून तक जेल से बाहर रहेंगे और 2 जून को उन्हें वापस प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने सरेंडर करना होगा। एक लाइन में कहें तो यह बीच चुनाव में विपक्ष का मनोबल बढ़ाने वाला फैसला है।

चुनावों में यह बहुत ही मददगार होगा-ममता
सर्वोच्च अदालत के फैसले के फौरन बाद टीएमसी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक्स पर पोस्ट लिखकर खुशी का इजाहर किया है। उन्होंने लिखा, 'मैं बहुत खुश हूं कि अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत मिली है। मौजूदा चुनावों में यह बहुत ही मददगार होगा।' एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के सुप्रीमो शरद पवार ने भी इसी तरह की भावनाएं जाहिर की हैं।
लोकतंत्र की जीत हुई- आम आदमी पार्टी
केजरीवाल की पार्टी यूं तो दिल्ली और पंजाब के लोकसभा चुनावों में ही प्रमुख भूमिका में है। लेकिन, उसके इंडिया ब्लॉक में शामिल होने की वजह से विपक्ष इस अंतरिम जमानत को बीजेपी और मोदी सरकार के खिलाफ जीत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। इंडिया ब्लॉक वोटरों को यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तारियां गलत तरह से की गई हैं। आम आदमी पार्टी ने इसे 'लोकतंत्र की जीत' बताया है।
झारखंड में भावनात्मक मुद्दा बनाने की कोशिशें शुरू
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा है, 'हम अरविंद केजरीवाल को बेल देने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई दखल का स्वागत करते हैं, हम यह भी उम्मीद करते हैं कि प्रधानमंत्री को 4 जून के बाद पर्याप्त समय मिलेगा, जब वह भारत के पूर्व प्रधानमंत्री हो जाएंगे, साबरमती आश्रम में बैठकर आत्ममंथन करें जिस तरह की राजनीति में वे संलिप्त हैं। हमें उम्मीद है कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी अपेक्षित न्याय मिलेगा।'
मतलब साफ है कि कांग्रेस को केजरीवाल का हवाला देकर झारखंड में यह प्रचार करने का मौका मिल गया है कि सोरेन भी सुप्रीम कोर्ट की दखल से इसी तरह से बाहर आ सकते हैं। चुनावों के दौरान मतदाताओं को अपने पक्ष में करने का यह तगड़ा भावनात्मक मुद्दा साबित हो सकता है।
बीजेपी मतदाताओं को याद दिलाएगी केजरीवाल के वापस से जेल जाने की बात
बीजेपी को भी एहसास है कि विपक्ष सुप्रीम कोर्ट के फैसले को किस तरह से भुनाने की कोशिश में है, इसलिए उसकी भी लाइन तैयार है। अदालत के फैसले से होने वाले संभावित चुनावी नुकसान के लिए पार्टी भी यह बताने की कोशिश करेगी कि यह सिर्फ अंतरिम जमानत है और अगर आम आदमी पार्टी सुप्रीमो बेगुनाह होते तो उन्हें 2 जून को वापस सरेंडर करने के लिए नहीं कहा गया होता।
भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, 'अरविंद केजरीवाल केवल 15 दिन चुनाव के लिए बाहर रह सकेंगे। शराब घोटाले में लिप्त अरविंद केजरीवालजी, भ्रष्टाचार में लिप्त अरविंद केजरीवालजी, बेईमानी..करप्शन का पैसा इकट्ठा करने वाले अरविंद केजरीवालजी को 1 (जून) तारीख को दोबारा जेल जाना होगा। आज बड़ा स्पष्ट हो गया...अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी कहती थी वो ईमानदार हैं, उन्होंने कोई करप्शन नहीं की, कोई बेईमानी नहीं की तो फिर उनको 1 तारीख को जेल क्यों जाना होगा?'
पंजाब में खास असर की संभावना कम
जहां तक आम आदमी पार्टी की बात है तो पंजाब में वह पहले से ही बड़ी ताकत बन चुकी है। वहां बीजेपी भी इस बार खूब कोशिश कर रही है। लेकिन, केजरीवाल के जेल से छूटने से वहां इंडिया को खास लाभ मिलेगा, इसकी संभावना अभी ज्यादा नहीं दिख रही। वैसे भी वहां इंडिया ब्लॉक ही बंटा है और कांग्रेस अलग से चुनाव मैदान में है।
दिल्ली में सहानुभूति वोट मिलने की संभावना
केजरीवाल की पार्टी को इस फैसले से सबसे ज्यादा उम्मीदें दिल्ली से होंगी। यहां उनकी सरकार है। 9 वर्षों से वह सत्ता में है, लेकिन 2014 और 2019 के दोनों लोकसभा चुनावों में राजधानी की सात की सात सीटें बीजेपी जीतती रही है। इस बार यहां इंडिया ब्लॉक के तहत कांग्रेस के साथ गठबंधन हुआ और 4 पर एएपी और 3 पर कांग्रेस मैदान में है।
निश्चित रूप से सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से दिल्ली के फ्लोटिंग वोटर्स पर कुछ असर पड़ने की संभावना बढ़ी है और इंडिया ब्लॉक को सहानुभूति वोट मिल सकते हैं।। लेकिन, इससे अंतिम चुनाव परिणाम में कोई बहुत बड़ा उलटफेर होगा यह संभावना अभी नहीं है।
रही बात इंडिया ब्लॉक की तो लगता है कि उसके लिए यह फैसला आम आदमी पार्टी से ज्यादा कारगर साबित हो सकता है और वह पूरे देश में बीजेपी के खिलाफ इसे हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है और 'लोकतंत्र खतरे में है' वाले अपने प्रचार अभियान को ज्यादा मजबूती से रखने की कोशिश कर सकती है।












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