खास मकसद से जंग से पंगा लिया केजरीवाल ने
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) दिल्ली में उपराज्यपाल नजीब जंग से पंगा लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपनी कैबिनेट के मंत्रियों के नकारापन को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं कि उन्होंने उपराज्यपाल से अपने अधिकारों के लिए जो विवाद किया वह अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप न हो कर जनता का ध्यान बांटना है।
ताकि जनता का ध्यान हटे
वरिष्ठ लेखक देव सिंह रावत कहते हैं कि यह तमाशा केवल केजरीवाल का अपने साथियों के साथ किया गया विश्वासघात, फर्जी डिग्रियों में घिरे अपने मंत्री-विधायक व गजेन्द्र प्रकरण से जनता का ध्यान हटाने के लिए किया गया है।
केजरीवाल को मालूम सीमाएं
दिल्ली के मुख्यमंत्री व उसकी सरकार की क्या सीमायें हैं यह केजरीवाल व उनके मंत्री जानते है। पर यह मामला केवल जनता का ध्यान हटाने के लिए है। देश में संविधान द्वारा प्रदत व्यवस्था चलानी है तो इस प्रकार की आरजकता को बढावा किसी भी कीमत पर नहीं दिया जा सकता। कोई जानबूझ कर खुद व दूसरों को भी गटर में धकेलेने की प्रवृति को किसी भी समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कुछ ही अधिकार
रावत कहते हैं कि संविधानवेताओं ने दिल्ली की इसी महता को देख कर दिल्ली की विधानसभा को कुछ ही अधिकार दिये है। संविधान इस पर सजग है कि कभी भी दिल्ली में कोई अहंकारी व पदलोलुप सरकार पदासीन हो गयी तो उसका केन्द्र सरकार से टकराव न हो।
खुराना से दीक्षित तक
इसलिए दिल्ली सरकार को पुलिस, जमीन आदि अधिकार नहीं दिये गये। मदनलाल खुराना से लेकर शीला दीक्षित ने दिल्ली में बखूबी से राज ही नहीं किया अपितु विकास भी किया, उनको अपनी सीमाओं का भान था। उसी के तहत उन्होंने विकास किया।
कभी कोई टकराव अगर हो भी गया तो उन्होंने तुरंत संभाल भी लिया। परन्तु लगता है जिस प्रकार से केजरीवाल व उनकी सरकार विवाद को तूल दे रही है उससे साफ है कि उनको न देश की चिंता है व नहीं संविधान की।
इस बीच, जानकारों ने बताया कि दिल्ली की कार्यकारी सचिव शकुंतला गैमलिन,जिनकी इस पद पर नियुक्ति के चलते उकत् विवाद हुआ, उन्होंने भी केजरीवाल से शुक्रवार को मिलकर अपनी शिकायत करवाई। उन्होंने केजरीवाल से कहा कि उन्हें बिना साक्ष्यों के करप्ट कहा जा रहा है।













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