केजरीवाल खांस-खांस के परेशान और देश से खांसी की सीरप गायब

खांसी की सीरप में उपलब्ध साल्ट कोडिन फास्फेट और क्लोरोनेरामाइन के ज्यादा प्रयोग से नशा होता है और बीएसएफ को इस बात की जानकारी मिली है कि सिरप की बोतलें बांग्लादेश के रास्ते अन्य देशों में तस्करी की जा रही हैं। बीएसएफ ने इसकी जानकारी नारकोटिक्स को दी है जिसकी जांच चल रही है। सिर्फ एक माह में एक लाख खांसी की दवा की बोतलों की तस्करी से नारकोटिक्स के अफसरों में हड़कंप मच गया है।
उल्लेखनीय है कि एक प्रमुख और अग्रणी दवा कंपनी की यह खांसी की प्रभावी दवा है। इसका प्रयोग करने से शराब जैसा नशा होता है। शराब की तुलना में यह सस्ता होता है और नशा ज्यादा करता है। डायरेक्टर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो हैदराबाद की जांच में इनकी तस्करी होने की आशंका प्रकट की गई। इस पर सक्रिय हुए अफसरों ने जांच शुरू कर दी।
अफसरों का कहना है कि सीरप की तस्करी देश में दवा कारोबार से जुड़े किसी व्यक्ति के संरक्षण में की जा रही है, क्योंकि कंपनी वैध डिस्ट्रीब्यूटर या होलसेलर के अलावा किसी को इसकी बिक्री नहीं करती है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के जोनल डायरेक्टर और प्रवक्ता आरपी सिंह ने बताया कि मामला गंभीर और गोपनीय है। अभी जांच शुरू हुई है। अभिलेखों की जांच के बाद तस्करी के केंद्र का पता चल सकेगा। जांच में ड्रग इंस्पेक्टरों को भी लगाया गया है।












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