अन्ना हजारे का आंदोलन और देश में नई राजनीति का उदय: 2 बार के सीएम अरविंद केजरीवाल का अब तक कैसा रहा सफर?
Arvind Kejriwal Political Career: देश की राजनीति में 2011 का साल एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में दर्ज हुआ। देशभर में भ्रष्टाचार के खिलाफ उठी आवाजों ने जन लोकपाल आंदोलन को जन्म दिया। इस आंदोलन ने कई नायकों को सामने लाया, जिनमें एक प्रमुख चेहरा थे, सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और उनके साथ युवा नौकरशाह अरविंद केजरीवाल। इस जन आंदोलन से अरविंद केजरीवाल ने राजनीति में प्रवेश किया और दिल्ली के मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया।
केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी बनाई और दिल्ली में दो बार की सरकार बनाने के साथ देश की प्रमुख पॉलिटिकल पार्टियों की लिस्ट में शामिल हो गई। आप का दायरा दिल्ली से पंजाब पहुंचा। ऐसे में अब दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले सीएम पद से केजरीवाल ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया है।

अन्ना आंदोलन और केजरीवाल का उदय
2011 में भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जबरदस्त जन आंदोलन उभरा, जिसका नेतृत्व अन्ना हजारे ने किया। उनकी मांग थी एक सशक्त जन लोकपाल बिल की, जो भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने के लिए आवश्यक था। इस आंदोलन ने लाखों लोगों को सड़कों पर उतारा, और दिल्ली के जंतर मंतर पर यह आंदोलन काफी बड़ा रूप ले चुका था।
अरविंद केजरीवाल, जो पहले एक आईआरएस अधिकारी थे, ने अन्ना हजारे के साथ मिलकर इस आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने सरकार के खिलाफ आवाज उठाई और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए एक सशक्त तंत्र की मांग की। इस जन आंदोलन की वजह से अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल दोनों ही जनता की नजर में हीरो बन गए।
अरविंद केजरीवाल का राजनीति में प्रवेश
अन्ना हजारे के साथ आंदोलन के दौरान केजरीवाल को महसूस हुआ कि केवल आंदोलन से भ्रष्टाचार खत्म नहीं किया जा सकता। इसके लिए राजनीति में सक्रिय रूप से उतरना पड़ेगा। इसलिए 2012 में उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) की स्थापना की। इसका उद्देश्य था जनता के मुद्दों को मुख्यधारा की राजनीति में लाना और एक स्वच्छ और पारदर्शी सरकार स्थापित करना।
2013 में, केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा चुनावों में हिस्सा लिया और अप्रत्याशित रूप से बड़ी जीत हासिल की। दिल्ली की जनता ने उन्हें भ्रष्टाचार विरोधी लड़ाई के प्रतीक के रूप में देखा और उनकी पार्टी को समर्थन दिया। केजरीवाल ने 28 सीटों पर जीत हासिल कर पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि, उनकी सरकार 49 दिनों तक ही चली, क्योंकि जन लोकपाल बिल पास न होने की वजह से उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने का सफर
केजरीवाल ने 2015 में दोबारा दिल्ली के चुनावों में हिस्सा लिया और इस बार उनकी पार्टी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की। 70 में से 67 सीटों पर AAP की जीत ने भारतीय राजनीति में एक नई लहर पैदा की। इस बार केजरीवाल ने अपने कार्यकाल को पूरा किया और उनकी सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और जल आपूर्ति जैसे मुद्दों पर काम किया, जो कि जनता के बीच बेहद लोकप्रिय रहा।
2020 में भी अरविंद केजरीवाल ने भारी बहुमत से तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने कई योजनाएं शुरू की, जैसे 'मोहल्ला क्लिनिक', मुफ्त पानी और बिजली, और बेहतर सरकारी स्कूल, जिनसे उन्हें जनता का व्यापक समर्थन मिला।
जेल और इस्तीफा: एक नया मोड़
हाल के वर्षों में, अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी पर कई तरह के आरोप लगे, जिनमें भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़े मामले शामिल थे। इसके कारण उनकी सरकार और पार्टी के कुछ नेताओं पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कसने लगा। हाल ही में, उन्हें एक भ्रष्टाचार मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। करीब 5 महीने पूरे होने के बाद तिहाड़ जेल से जमानत पर निकले अरविंद केजरीवाल ने पार्टी और खुद को नई दिशा देने का ऐलान किया है।
'2 दिन बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा'
जेल से बाहर आने के बाद केजरीवाल ने पहली बार पार्टी के विधायकों और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने घोषणा करके हुए कहा,"मैं 2 दिन बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने जा रहा हूं। जब तक जनता अपना फैसला नहीं दे देती, मैं मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठूंगा। मैं हर घर और गली में जाऊंगा और जब तक जनता का फैसला नहीं मिल जाता, तब तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठूंगा।"
अरविंद केजरीवाल ने भावनात्मक रूप से पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए इस्तीफे की घोषणा कर दी। उन्होंने इसे एक राजनीतिक साजिश करार दिया, लेकिन इस कदम से उनके समर्थकों में चिंता बढ़ गई है। AAP का भविष्य अब इस बात पर निर्भर करता है कि केजरीवाल अपनी कानूनी लड़ाई कैसे लड़ते हैं और उनकी पार्टी इन चुनौतियों से कैसे उभरती है।
अब क्या होगी केजरीवाल की रणनीति?
अब तक अरविंद केजरीवाल का सफर भारतीय राजनीति में असाधारण रहा है। अन्ना हजारे के आंदोलन से उठकर दिल्ली के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने और फिर जेल जाने तक की उनकी कहानी में उतार-चढ़ाव रहे हैं। उन्होंने आम आदमी के मुद्दों को राजनीति के केंद्र में लाने का काम किया, लेकिन अब उन पर खुद गंभीर आरोप हैं। ऐसे में करीब आ रहे दिल्ली विधानसभा चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि केजरीवाल और उनकी पार्टी की आगे की रणनीति क्या होती है?
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