अरूणाचल प्रदेश में नदी में चीन ने मिलाया जहर? हजारों मछलियां मरी, स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा
अरूणाचल प्रदेश के पूर्वी केमांग जिले में एक नदी का पानी अचानक काला हो गया है, जिससे हजारों मछलियां मृत पाई गई हैं। स्थानीय लोगों ने चीन पर आरोप लगाए हैं।
इटानगर, अक्टूबर 30: अरूणाचल प्रदेश में एक नदी अचानक पूरी तरह से काली हो गई है, जिसकी वजह से हजारों मछलियों की मौत हो तुकी है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को स्थानीय लोगों ने अचानक नदी के पानी को पूरी तरह से काला देखा, वहीं नदी के किनारे में जहां-तहां हजारों की संख्या में मृत मछलियां मिली हैं, जिसके बाद प्रशासन की तरफ से अलर्ट जारी किया गया है। (सभी तस्वीर फाइल)

कैसे काली हो गई नदी?
रिपोर्ट के मुताबिक अरूणाचल प्रदेश के पूर्वी कामेंग जिले में स्थिति नदी का पानी पूरी तरह से काला हो गया, जिसके बाद अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर छानबीन शुरू कर दी है। वहीं, नदी के किनारे हजारों की संख्या में मछलियां मृत पाई गई हैं, जिसको लेकर अधिकारी ने अलर्ट जारी किया है और लोगों से फिलहाल इस नदी की मछलियां नहीं खाने की अपील की है। पीटीआई ने जिला मत्स्य पालन अधिकारियों के हवाले से कहा कि, पानी में टीडीएस की मात्रा काफी ज्यादा पाई गई है, जिसकी वजह से हजारों की संख्या में जलीय जीवों का दम घुट गया और उनकी मौत हो गई। अधिकारियों ने आगे कहा कि, पानी के नीचे की मछलियां भी टीडीएस के उच्च स्तर के कारण खतरे में हैं।

पानी में सामान्य से ज्यादा था टीडीएस
जिला मत्स्य विकास अधिकारी (डीएफडीओ) हाली ताजो ने कहा कि, कामेंग नदी में टीडीएस 6,800 मिलीग्राम प्रति लीटर था, जो सामान्य सीमा 300-1,200 मिलीग्राम प्रति लीटर से काफी ज्यादा है और जलीय जीवों के लिए ये पानी जहरीला बन गया था और हजारों लोगों की मौत हो गई। इस बीच, सेप्पा गांव, जहां यह घटना हुई थी, वहां के निवासियों ने पानी के जहरीला होने के पीछे चीन को दोषी ठहराया है। स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि, पड़ोसी देश द्वारा सीमा पार की जा रही निर्माण गतिविधियों के कारण टीडीएस का स्तर खतरनाक रूप से ज्यादा हो गया है।
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बड़े स्तर पर जांच की मांग
वहीं, सेप्पा पूर्व के विधायक टपुक ताकू ने राज्य सरकार से कामेंग नदी के पानी के रंग में अचानक बदलाव और बड़ी मात्रा में मछलियों की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए तुरंत विशेषज्ञों की एक समिति गठित कर जांच कराने की मांग की है। उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कहा कि, "अगर यह कुछ दिनों से अधिक समय तक जारी रहा, तो नदी से जलीय जीवन पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।"

अरूणाचल में पीएलए की गतिविधियां तेज
वहीं हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हफ्ते की शुरुआत से भारतीय सैनिकों ने इस बात को महसूस किया है कि, अरूणाचल प्रदेश की सीमा के पास भारी संख्या में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों ने गश्ती तेज कर दी है। हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा एक्सेस किए गए डेटा से पता चला है कि, भारतीय सेना ने लुंगरो ला, जिमीथांग और बुम ला में पीएलए की बढ़ी हुई गश्ती का पता लगाया है, जो पूर्वी क्षेत्र में 1962 में हुए चीनी आक्रमण के संदर्भ में ऐतिहासिक महत्व के क्षेत्र हैं। वहीं, भारतीय सेना ने बताया है कि, चीनी सैनिकों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की गई है।

पीएलए पर सख्त नजर
भारतीय सेना ने पीएलए की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उपग्रहों, लंबी दूरी के मानव रहित हवाई वाहनों, रडार के बेहतर नेटवर्क और हाई-टेक नाइट विजन सिस्टम का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। एक सैन्य अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि, सर्विलांस से पता चला है कि, चीनी क्षेत्र में तेजी से बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है, जिसके लिए बुलडोजर्स का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके कारण लुंगरो ला, जिमीथांग और बुम ला सेक्टरों में कई जगहों पर सड़कों को नुकसान पहुंचा है। वहीं, सीमा पार गतिविधियों में काफी तेजी देखी जा रही है।

2017 में भी हुआ था वाकया
इससे पहले 2017 में पासीघाट में सियांग नदी के इसी तरह के काले पड़ने की सूचना मिली थी। उस समय अरुणाचल पूर्व के तत्कालीन कांग्रेस सांसद निनॉन्ग एरिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने की मांग की थी, जिसमें दावा किया गया था कि यह चीन के तकलामाकन रेगिस्तान से झिंजियांग प्रांत तक 10,000 किलोमीटर लंबी सुरंग के निर्माण का परिणाम है, जिसके कचरे को सियांग से पानी की ओर मोड़ दिया। हालांकि, चीन ने इस आरोप का खंडन किया था।












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