चीन को मिलेगा माकूल जवाब! अरुणाचल प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर जोर
अरुणाचल प्रदेश सरकार की ओर सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास पर काफी ध्यान दिया जा रहा है। गौरतलब है कि चीन के रवैए को देखते हुए राज्य सरकार की यह पहल बहुत महत्वपूर्ण है।

लद्दाख समेत सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश पर चीन की बुरी नजर रही है। वह सीमा के उसपार लगातार बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर देता रहा है। पिछले करीब एक दशक से भारत ने भी इस ओर ध्यान दिया है और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को लेकर काफी काम हुआ है और बहुत सारे प्रोजेक्ट पर काम चल भी रहा है। इसी कड़ी में अरुणाचल प्रदेश सरकार भी सीमावर्ती क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने की कोशिशों में जुटी हुई है। वहां क्या कुछ चल रहा है, यह बात एक कांग्रेस नेता के जवाब में राज्य सरकार ने बताया है।

सीमावर्ती क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने पर जोर
अरुणाचल प्रदेश समेत वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के उस पार चीन लगातार अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है। ऐसी कई रिपोर्ट सामने आ चुकी हैं, जिसमें एलएसी के उसपार चीन की ओर से गांव बसाए जाने और हर मौसम में काम आने वाली सड़कों के विकास की खबरें आती रही हैं। अब देश के पूर्वोत्तरी राज्य अरुणाचल प्रदेश ने भी अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया है। वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ-साथ भूटान और म्यामांर से सटी अंतराष्ट्रीय सीमा पर भी इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की पहल की गई है।

65 मॉडल गांवों का विकास
गौरतलब है कि देश में सीमावर्ती इलाकों को लंबे समय से उपेक्षित छोड़ा गया था। लेकिन, मौजूदा केंद्र सरकार ने इस दिशा में बहुत ज्यादा ध्यान दिया है और उसकी वजह से परिवर्तन धरातल पर नजर आना शुरू भी हो चुका है। इस बीच ईस्टमोजो की एक रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चॉवना मेइन ने बताया है कि बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम (BADP) के तहत 65 मॉडल गांवों में बुनियादी ढांचे का विकास किया गया है।

Recommended Video
कांग्रेस विधायक को राज्य सरकार ने दिया जवाब
रिपोर्ट के मुताबिक डिप्टी सीएम ने कांग्रेस एमएलए निनोंग एरिंग के सवालों का जवाब देते हुए यह बात कही। उन्होंने सरकार से जवाब मांगा था कि भारत की सीमा के उसपार चीन की निर्माण गतिविधियों को देखते हुए राज्य सरकार ने क्या कदम उठाए हैं। इसके जवाब में मेइन ने कहा, 'सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को पूरा करने के लिए सड़क संपर्क, फुट सस्पेंशन ब्रिज, स्वास्थ्य सुविधाएं, पेयजल और बिजली की सुविधाएं बीएडीपी और प्रदेश के फंड से भी आवंटन के जरिए उपलब्ध कराई गई हैं।'

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दिया संकेत
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में अरुणाचल प्रदेश दौरे के समय का था कि बुनियादी ढांचे के विकास से सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के जीवन में बदलाव आता है और यह इलाके के लिए गेमचेंजर साबित होता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा था, 'मैदानों में सरकार स्मार्ट सड़कें बना रही है, लेकिन कई सीमावर्ती इलाकों में सड़कें अपर्याप्त हैं। कई इलाकों में तो बेसिक ट्रैक भी नहीं हैं। ऐसे दूर-दराज क्षेत्रों में सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं के साथ ही मूल जन सुविधाओं की पहल की गई है, जैसे कि बिजली, दूर-संचार, शिक्षा और स्वास्थ्य जिसके लिए कनेक्टिविटी आवश्यक है।'

पूर्वोत्तर का विकास सरकार की प्राथमिकता- रक्षा मंत्री
रक्षा मंत्री ने कहा था कि पूर्वी एशिया के द्वार होने की वजह से उत्तर-पूर्वी क्षेत्र का विकास सरकार की प्राथमिकता है। उत्तर-पूर्वी भारत न सिर्फ पूरे राष्ट्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पूर्वी एशिया के साथ व्यापार, यात्रा और पर्यटन के संबंधों को भी सशक्त करता है। शिक्षा के क्षेत्र में विकास के लिए 80 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से चार नए विवेकानंद केंद्रीय विद्यालयों के निर्माण और चार ऐसे ही मौजूदा स्कूलों का विकास किया जाना है। प्रदेश के डिप्टी सीएम के मुताबिक 2017-18 में सीमावर्ती इलाके में 8 मॉडल स्कूल स्थापित हुए थे। (इनपुट-एएनआई)












Click it and Unblock the Notifications