जेटली ने महागठबंधन को बताया, एक जांचा-परखा और फेल हो चुका आइडिया

नई दिल्ली। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि महागठबंधन का विचार कोई नया नहीं है। ये एक आजमाया हुआ और खारिज हो चुका आइडिया है। जेटली ने 2019 में विपक्ष के एकजुट होकर भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ने की खबरों को लेकर ये बात कही है। विपक्ष के कई नेता एनडीए के बाहर के दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। इसे जेटली ने जांचा, परखा और खारिज किया हुआ विचार करार दिया है।

तेलंगाना में महागठबंधन का विचार फेल

तेलंगाना में महागठबंधन का विचार फेल

एक इंटरव्यू में जेटली ने कहा कि महागठबंधन बनाने का विचार तो पहले से ही दम तोड़ चुका है। गठबंधन के भीतर ही दो अलग-अलग विचार चल रहे हैं। एक तरफ कांग्रेस, द्रमुक, टीडीपी और कुछ कम्युनिस्ट पार्टियां हैं तो दूसरी ओर टीआरएस और कुछ दल गैर-कांग्रेस, गैर-भाजपा फ्रंट बनाने की कोशिश कर रहे हैं। जेटली ने कहा कि हाल में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में तेलंगाना में कांग्रेस का महागठबंधन का प्रयोग पूरी तरह से फेल हुआ है।

बेहतर को कि चुनाव राहुल और मोदी के बीच हो

बेहतर को कि चुनाव राहुल और मोदी के बीच हो

जेटली ने कहा कि 2019 का लोकसभा चुनाव इस मुद्दे पर जनमत संग्रह है कि क्या हम मोदी को दोबारा लाना चाहते हैं। चुनाव में मतदाताओं के सामने एक तरफ मोदी तो दूसरी ओर अस्पष्ट विचारों के नेता हैं। अरुण जेटली ने कहा है कि बेहतर होता कि आगामी चुनाव अमेरिकी राष्ट्रपति प्रणाली की तरह राहुल और मोदी के बीच होता।

कर्जमाफी का अर्थव्यवस्था पर गलत असर

कर्जमाफी का अर्थव्यवस्था पर गलत असर

अरुण जेटली ने कई राज्यों सरकारों के किसानों के कर्जमाफ करने पर कहा कि इससे राज्यों का वित्तीय आंकड़ा गड़बड़ा सकता है। जेटली ने कहा है कि उनकी सरकार किसानों के लिए लगातार काम कर रही है और उन्हें मजबूत करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री लगातार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात कहते रहे हैं।

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