Article 370 हटने के बाद कितने पंडितों ने छोड़ी कश्मीर घाटी ? सरकार ने संसद में दिए आंकड़े
नई दिल्ली, 20 जुलाई: पिछले कुछ महीनों में आतंकवादियों ने कश्मीर घाटी में पंडितों, प्रवासी मजदूरों की टारगेट किलिंग करके उनकी सुरक्षा को लेकर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। लेकिन, उसके बाद सरकार ने देश के दुश्मनों के खिलाफ नकेल और कसी है। बुधवार को सरकार ने संसद में बताया है कि 5 अगस्त, 2019 को जब आर्टिकल 370 हटाया गया था, उसके बाद घाटी में कितने कश्मीर पंडितों को दहशतगर्दों ने निशाना बनाया और कितने बाकी नागरिक उनके हाथों मारे गए हैं। इसके साथ सरकार ने यह भी जानकारी दी है कि 5 अगस्त, 2019 से लेकर अबतक कितने कश्मीरी पंडितों ने घाटी से पलायन किया है।

3 साल में 5 कश्मीरी पंडितों की हत्या हुई-सरकार
केंद्र सरकार ने बुधवार को लोकसभा को बताया है कि 5 अगस्त, 2019 के बाद से कश्मीर घाटी में कुल 21 गैर-मुस्लिम कश्मीरियों और घाटी से बाहर के लोगों की आतंकियों के हाथों हत्याएं हुई हैं। एक सवाल के लिखित जवाब में गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने सदन को बताया, '5 अगस्त, 2019 से 9 जुलाई, 2022 तक जम्मू और कश्मीर में आतंकियों के हाथों सुरक्षा बलों के 128 जवानों और 118 नागरिकों की हत्याएं हुई हैं। 118 नागरिकों में से 5 कश्मीरी पंडित थे और 16 अन्य हिंदू/सिख समुदायों से जुड़े थे। इस अवधि में एक भी तीर्थयात्री की हत्या नहीं हुई है।'

पिछले कुछ महीनों में की गई टारगेट किलिंग
5 अगस्त, 2019 को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 के तहत इसे प्राप्त विशेष दर्जा खत्म करने और प्रदेश को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने का फैसला किया था। कुछ महीने पहले जब कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकियों ने एक महिला टीचर की हत्या कर दी थी तो एक कश्मीरी पंडित कर्मचारी संगठन ने उन्हें 24 घंटे के भीतर किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित नहीं करने की सूरत में घाटी छोड़ने की धमकी दी थी। जम्मू के सांबा जिले की रहने वाली रजनी बाला को कुलगाम के एक सरकारी स्कूल के भीतर आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी, जहां वो अपनी ड्यूटी दे रही थीं। उनसे पहले बडगाम में राहुल भट नाम के एक क्लर्क को तहसीलदार दफ्तर के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पिछले साल अक्टूबर में एक मशहूर कश्मीरी पंडित माखन लाल बिंदरू जो कि एक फार्मेसी के मालिक थे, उनकी भी आतंकियों ने हत्या कर दी थी, साथ ही साथ कुछ प्रवासी मजदूरों का भी कत्ल कर दिया था।

2018 के मुकाबले 2021 में आतंकी हमलों में पर्याप्त कमी
2021 में कश्मीरी पंडितों को आतंकियों द्वारा निशाना बनाए जाने के बाद से कथित तौर पर कई कश्मीरी पंडितों के घाटी छोड़कर जम्मू चले जाने के दावे किए जा रहे थे। कश्मीर में सरकारी ड्यूटी पर तैनात कुछ कश्मीरी पंडितों ने सरकार पर उन्हें घाटी में ही तैनात रहने के लिए मजबूर करने के भी आरोप लगाए थे। इसी तरह से प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे थे। बुधवार को सरकार ने संसद को बताया, 'आतंकवाद के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति है और जम्मू और कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। हमलों में 2018 में 417 से 2021 में 229 तक की पर्याप्त गिरावट आई है।'

'किसी भी कश्मीरी पंडित ने घाटी से पलायन नहीं किया'
जब घाटी में हाल में आतंकावादियों के हाथों हुई हत्याओं को लेकर सरकार से प्रश्न पूछा गया तो गृह राज्यमंत्री ने कहा, 'घाटी में प्राइम मिनिस्टर डेवलपमेंट पैकेज के तहत 5,502 कश्मीरी पंडितों को जम्मू और कश्मीर सरकार के विभिन्न विभागों में सरकारी रोजगार उपलब्ध करवाए गए हैं।' इसके साथ ही उन्होंने संसद से कहा, 'रिकॉर्ड के मुताबिक उक्त अवधि के दौरान जानकारी के अनुसार किसी भी कश्मीरी पंडित ने घाटी से पलायन नहीं किया है।'

6,000 ट्रांजिट आवास का हो रहा है निर्माण
बता दें कि नरेंद्र मोदी सरकार पलायन कर चुके कश्मीरी पंडितों को घाटी में फिर से बसाने की कोशिश कर रही है। राय ने बताया कि 7 नवंबर, 2015 को घोषित प्राइम मिनिस्टर डेवलपमेंट पैकेज के तहत कश्मीरी प्रवासी कर्मचारियों के लिए घाटी के विभिन्न जिलों में 6,000 ट्रांजिट आवास के निर्माण की भारत सरकार ने मंजूरी दी है। इनमें से 1,025 यूनिट तैयार हैं या तैयार होने की स्थिति में हैं, 1,872 यूनिट तैयार होने की अलग-अलग स्थिति में हैं और बाकी पर काम शुरू किया गया है।












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