NIPUN: पाकिस्तान और चीन से सटी सीमा के लिए आर्मी को मिला ये 'अचूक' हथियार, जानिए और क्या खास ?
पुणे, 21 दिसंबर: पाकिस्तान और चीन की हरकतों को देखते हुए भारतीय सेना को कुछ अचूक हथियार मिले हैं, जिससे वह दुश्मन को जरूरत के मुताबिक जहीं का तहीं रोकने में सक्षम बन गई है। यह है एंटी-पर्सनेल और एंटी-टैंक माइंस जो भारत में ही विकसित किए गए हैं। भारतीय सेना शुरू में एंटी-पर्सनेल माइंस 'निपुण' शामिल कर रही है और भविष्य में इस तरह के कई और हथियार उसे मिलने वाले हैं। यही नहीं लद्दाख में कड़ाके की सर्दी में मोर्चा संभालने वाले जवानों की सहायता के लिए सेना ने अपनी विशेष खरीद शक्तियों का इस्तेमाल करके ऐसे पंप भी मंगवाए हैं, जिनसे उन्हें ऊंचाई वाले स्थानों पर पानी और ईंधन की समस्या दूर होगी।
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एलएसी पर हाई हेड पंप का इंतजाम
लद्दाख के कई इलाकों में पिछले कई दिनों से न्यूनतम तापमान माइनस 19 डिग्री से लेकर माइनस 9 डिग्री तक चला जा रहा है। सोमवार को द्रास में पारा माइन 19 डिग्री तक गिर गया था। जाहिर है कि ऐसे में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तैनात भारतीय सेना के जवानों को किन कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा होगा। कड़ाके की सर्दी में वहां जमे रहने के लिए उनतक निर्बाध रूप से पानी और ईंधन की सप्लाई भी खास मायने रखती है। लेकिन अब भारतीय सेना ने इस मोर्चे पर बड़ी पहल करते हुए खुद को मिली आपातकालीन खरीद शक्तियों का बेहतरीन इस्तेमाल किया है।

200 हाई हेड वॉटर पंप लगेंगे
भारतीय सेना ने एलएसी के पास के हाई अल्टीट्यूड वाले क्षेत्रों में तैनात जवानों तक पानी और ईंधन पहुंचाने में मदद के लिए 200 हाई हेड वॉटर पंप को शामिल करना शुरू कर दिया है। ये पंप इंजीनियर कोर में उन्हें प्राप्त आपातकालीन खरीद शक्तियों के तहत शामिल किए जा रहे हैं। यह जानकारी भारतीय सेना के अधिकारियों ने दी है। इन पंपों की मदद से सैन्य ठिकानों तक पानी और ईंधन पहुंचाने में काफी सहायता मिलेगी, खासकर बर्फीली मौसम में इससे बहुत बड़ी समस्या दूर होने की उम्मीद है।

सेना को मिल रही हैं एंटी-पर्सनेल और एंटी-टैंक माइंस
जहां भारतीय सेना को मोर्चे पर डटे रहने के लिए उचित व्यवस्था की जा रही है, वहीं इसे खासकर चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों को देखते हुए 'मेड इन इंडिया' एंटी-पर्सनेल और एंटी-टैंक माइंस भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं। ये माइंस भारत में ही डिजाइनऔर विकसित की गई हैं और चीन और पाकिस्तान से सटी सीमा पर दुश्मनों के किसी भी नापाक मंसूबे को कुचलने के लिए प्रथम सुरक्षा प्रहरी के तौर पर काम करेंगी। भारतीय सेना के अधिकारियों के मुताबिक, 'भारतीय सेना के इंजीनियर कोर को नई एंटी-पर्सनेल और एंटी-टैंक माइंस सेट मिल रहे हैं, जो दुश्मन की पैदल सेना और सशस्त्र कमान या अपने क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश कर रहे आतंकियों के खिलाफ फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस के रूप में काम करेगी।'(ऊपर वाली तस्वीर-फाइल)

7 लाख निपुण एंटी-पर्सनेल माइंस शामिल होंगी
पुणे में सेना के अधिकारी ने बताया कि 'भारतीय सेना स्वदेश में विकसित 7 लाख 'निपुण' एंटी-पर्सनेल माइंस शामिल कर रही है जो आरडीएक्स मिश्रण के लिए सक्षम है। ' उनके मुताबिक इस माइंस को एक भारतीय कंपनी ने डीआरडीओ की साझेदारी में विकसित किया है। वहीं दुश्मनों की टैंक रेजिमेंट को ध्वस्त करने के लिए इंजीनियर कोर भारत में बने नेक्स्ट जेनरेशन 'वैभव' और 'विशाल' एंटी-टैंक माइंस का ट्रायल कर रहा है। इस बेहतरीन माइंस को भारतीय सेना के लिए डीआरडीओ ने विकसित किया है और यह इस्तेमाल के लिए एडवांस स्टेट ट्रायल में है। सेना के अफसरों के मुताबिक ये माइंस अपनी एडवांस डिजाइन और सेंसर की वजह से दुश्मनों को के टैंक को रोकने के लिए बहुत ही शक्तिशाली हैं। सूत्रों के अनुसार निकट भविष्य में 'प्रचंड', 'उल्का' और 'पार्थ' जैसी नई माइंस भी शामिल किए जाने वाली हैं।












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