आखिरी व्यक्ति की जान बचाएगी, तभी सेना बैरक में वापस जाएगी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर पिछले 66 वर्षों में सबसे बड़ी बाढ़ का सामना करने को मजबूर है। बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में भारतीय सेना लोगों की जान बचाने में दिन-रात एक किए हुए है। आर्मी प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग की मानें तो जब तक आखिरी व्यक्ति को बाढ़ से बचा नहीं लिया जाता, भारतीय सेना अपने बैरक में वापस नहीं जाएगी।

अपनी जान मुश्किल में डालते सैनिक
जिस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जम्मू-कश्मीर राज्य के दौरे पर पहुंचे थे सेना प्रमुख जनरल सुहाग ने उन्हें स्थिति से अवगत कराया था।150 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग बेघर हो चुके हैं। कई लोग अपनों से बिछड़ गए हैं तो कहीं किसी का कीमती सामान खो गया है।
जम्मू-कश्मीर में इस समय आर्मी ने अपने 184 कॉलम्स को राहत और बचाव कार्यों में तैनात किया हुआ है। यहां पर आपको बता दें कि सेना के जवान अपनी जान को मुश्किल में डालकर बचाव कार्यों को अंजाम दे रहे हैं।
शनिवार को पुलवामा में जिस समय सेना के जवान बचाव कार्यों में लगे हुए थे, उसी समय नौ जवान बह गए। इनमें से सात जवान तो मिल गए हैं लेकिन दो जवानों का अभी तक पता नहीं लग सका है।
लोगों को याद आए लेफ्टिनेंट जनरल चैत
वर्ष 2013 में जब उत्तराखंड में बादल फटा था उस समय भी भारतीय सेना ने रक्षक की भूमिका अदा की थी। 'ऑपरेशन सूर्य होप' के तहत उस आपदा में फंसे लोगों को बचाने का काम किया गया था। यह ऑपरेशन लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चैत की अगुवाई में चला था।
सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग के इस बयान ने कई लोगों को लेफ्टिनेंट जनरल चैत की याद आ गई। उस समय लेफ्टिनेंट जनरल चैत ने कहा था कि सेना और सैनिक भगवान नहीं हैं लेकिन वह हर व्यक्ति को बचाएंगे। जब तक हर व्यक्ति सुरक्षित नहीं निकाल लिया जाता तब तक ऑपरेशन बंद नहीं होगा।












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