क्या आपकी बीवी आपको प्रताड़ित करती है?

जी हां देश में महिलाओं पर बढ़ती हिंसा व दहेज प्रथा जैसे जघन्य अपराधों से निपटने के लिए वैसे तो कर्इ कानून पारित किये गये हैं। कानून बनाने का मुख्य उददेश्य यह था कि महिलाओं की सिथति को सुदृढ़ बनाया जा सके और उन्हें समाज में वह सब सम्मान मिल सके जिसकी वे हकदार हैं। पर महिलाओं द्वारा प्रताड़ित पुरुषों के लिए कोर्इ भी कानून नही बनाया गया। ऐसा कोई आयोग नहीं बना, जहां विशेष रूप से पुरुषों की फरियाद सुनी जा सके या वो अपना दुखड़ा रो सकें। वो आयोग है पुरुष आयोग।
पत्नियों से ज्यादा पति करते हैं आत्महत्या
जी हां समाज के एक वर्ग में अब पुरुष आयोग की जरूरत भी महसूस की जाने लगी है। इस जरूरत को समझते हुए एक निजी संस्था पति परिवार कल्याण समिति की अध्यक्ष डा. इंदु सुभाष ने महसूस किया है और पुरुष आयोग के गठन को लेकर अपने अभियान की शुरुआत कर दी है। हाल ही में लखनऊ में स्थित यूपी प्रेस क्लब में एक कार्यक्रम में महिलाओं के जुल्म से तंग आ चुके पुरुषों की दास्तानें बयां की गईं। डा. इंदु के अनुसार महिलाओं द्वारा कानूनों का दुरुपयोग करके निर्दोष पति-परिवार व पुरुषों को जेल भेजने का डर बनाकर सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक व मानसिक शोषण जमकर किया जा रहा है।
असंस्कारी बहुएं दहेज आदि के झूठे मुकदमें लिखवाकर पुरुषों को जेल भेजने जैसी हरकतें कर रही हैं। एन.सी.आर.बी. भारत सरकार द्वारा सर्वे की एक रिपोर्ट के अनुसार पता चला कि पत्नियों से दो गुनी संख्या में पति आत्महत्या कर रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि सन 2012 में 31929 विवाहित महिलाओं के सापेक्ष 63343 विवाहित पुरुषों ने आत्महत्या की। अब सवाल यह उठता है कि क्या असंस्कारी बहू का यह कृत्य पुरुष मानसिक प्रताड़ना की श्रेणी में नही आता? ऐसे एकतरफा कानूनों के कारण वास्तव में प्रताड़ना का शिकार पति और उसका पूरा परिवार होता है।
पुरुषों को प्रताड़ित किये जाने के मामलों को लेकर यह अभियान शुरू किया जा चुका है और बहुत जल्द एक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जायेगा। यही नहीं यह संस्था उन पतियों के प्रोफाइल भी इकठ्ठा कर रही है, जो अपनी पत्नी द्वारा लगाये गये झूठे आरोपों की वजह से परेशान हैं।












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