अमेरिका से यूरोप होते हुए भारत आ रही हाड़ कंपाने वाली सर्दी

नई दिल्‍ली। उत्‍तर भारत में हाड़ कंपाने वाली सर्दी पड़ रही है। मंगलवार को राजस्थान के चूरू में तापमान -1.1 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। भारत में यह मान्‍यता है कि मकर संक्रांति के बाद सर्दी धीरे-धीरे कम होनी शुरू हो जाती है, लेकिन इस बार उल्‍टा हो गया। मकर संक्रांति के बाद से ठंड और बढ़ गई है। आखिर इसके पीछे कारण क्‍या है? जवाब पुख्‍ता तो नहीं है, लेकिन मौसम विभाग ने जो संभावना जताई है, वह हैरान करने वाली है। मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि आर्कटिक से निकलने वाली ठंड यूरोप और अमेरिका में दक्षिण की ओर फैल रही है, जो पश्चिमी विक्षोभ को उत्तर भारत की तरफ धकेल रही है, जिसकी वजह से भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है।

पश्चिमी विक्षोभ इस तरह बढ़ा रहा भारत में ठंड

पश्चिमी विक्षोभ इस तरह बढ़ा रहा भारत में ठंड

आर्कटिक क्षेत्र, उत्‍तरी ध्रुव के चारों ओर फैला विशाल क्षेत्र है। आकार की बात करें तो यह धरती के लगभग 1/6 भाग पर फैला है। आसान शब्‍दों में कहें तो इसका साइज रूस, चीन और भारत के आकार के बराबर है। मौसम विभाग का कहना है कि आर्कटिक पर पोलर वोर्टेक्स (ध्रुवीय चक्रवात) से हवाओं में उतार-चढ़ाव के कारण दिसंबर 2018 से लेकर अब तक ठंड का असर अमेरिका, यूरोप और उत्तर भारत में पड़ता दिख रहा है। पश्चिमी विक्षोभ (WD) निम्न दाब की हवाओं के कण हैं, जो भूमध्यसागरीय क्षेत्र से पश्चिम और आसपास की ओर से आती हैं। ये हवा या तो हिमालय से टकराकर उत्तर भारत को प्रभावित करती हैं या फिर उत्तर की ओर उड़ जाती हैं। इस साल जनवरी में अब तक 7 पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत को प्रभावित कर चुके हैं, सामान्‍य तौर पर इनकी संख्‍या 4 से 6 के बीच रहती है। मौसम विभाग के मुताबिक जनवरी का अंतिम पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत से टकरा चुका है, जिसका प्रभाव गुरुवार तक रहेगा। इस वजह से पश्चिमी हिमालय क्षेत्र (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) में भारी बर्फबारी और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बारिश की संभावना जताई गई है।

क्‍या है पोलर वोर्टेक्‍स या आर्कटिक ब्‍लास्‍ट

क्‍या है पोलर वोर्टेक्‍स या आर्कटिक ब्‍लास्‍ट

पश्विमी विक्षोभ का भारत पर किस प्रकार से असर पड़ रहा है, इसका अंदाजा बात से लगाया जा सकता है कि इस उन पहाड़ी इलाकों में बर्फ गिरी है, जहां पिछले 10 साल बर्फबारी हुई ही नहीं। यह सब हो रहा है आर्कटिक ब्‍लास्‍ट/पोलर वोर्टेक्‍स (ध्रुवीय चक्रवात) की वजह से। उत्‍तरी ध्रुव पर अंटार्कटिका महासागर है, जहां पर -89 तक गिर जाता है। तापमान जब ज्‍यादा कम हो जाता है तो इस इलाके में बर्फीला तूफान आने लगता है। यहां से चलने वाली ठंडी हवा से सर्दी कर सितम बढ़ जाता है।

अमेरिका में पोलर वोर्टेक्‍स ने तोड़ सर्दी के सारे रिकॉर्ड, शिकागो में पारा -29 डिग्री तक गिरा

अमेरिका में पोलर वोर्टेक्‍स ने तोड़ सर्दी के सारे रिकॉर्ड, शिकागो में पारा -29 डिग्री तक गिरा

अमेरिका में तो पोलर वोर्टेक्स (ध्रुवीय चक्रवात) के कारण सर्दी ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। शिकागो में पारा -29 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है। यह नया रिकॉर्ड है। शिकागो में 11 बार पारा शून्य से नीचे गया था। सबसे कम तापमान 20 जनवरी 1985 को -27 डिग्री सेल्सियस रहा था। अमेरिका के विस्‍कॉन्‍सिन में दो फीट और इलिनॉय में 6 इंच बर्फबारी। जॉर्जिया और अल्‍बामा में 4 इंच बर्फ पड़ी है। अमेरिका के मध्‍य पश्विमी राज्‍यों- विस्‍कॉन्‍सिन, मिशिगन और इलिनॉय आदि में आपातकाल घोषित कर दिया गया है।

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