यूपी चुनाव से पहले अपना दल भी ऐक्टिव, क्रीमी लेयर की सीमा इतने लाख करने की मांग
नई दिल्ली, 26 अगस्त: जातिगत जनगणना राजनीतिक दलों को वोट बटोरने का एक बहुत बड़ा हथियार नजर आ रहा है। खासकर यूपी चुनाव में ओबीसी वोट की अहमियत को देखते हुए राजनीतिक दल इसपर पूरा जोर लगा रहे हैं। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को भाजपा की सहयोगी पार्टियों से ही इस मुद्दे पर काफी दबाव झेलना पड़ रहा है। अब केंद्रीय मंत्री और अपना दल की चीफ अनुप्रिया पटेल ने भी इसकी पूरजोर वकालत कर दी है। यही नहीं उन्होंने केंद्र में ओबीसी मंत्रालय बनाने के साथ ही क्रीमी लेयर की सीमा भी करीब दोगुनी बढ़ाने की मांग कर दी है।

जातिगत जनगणना पर अपना दल भी ऐक्टिव
बीजेपी की सहयोगी अपना दल ने भी जातिगत जनगणना पर जोर देना शुरू कर दिया है। पार्टी का दावा है कि पिछड़ी जातियों की संख्या और आर्थिक स्थिति समझने के लिए इस तरह की जनगणना जरूरी है। यही नहीं पार्टी की नेता और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने तो ओबीसी के लिए अलग से एक मंत्रालय के गठन तक की भी मांग कर दी है। पार्टी यह भी कह रही है कि अभी जो आरक्षण के लिए 8 लाख रुपये की सीमा क्रीमी लेयर के तहत निर्धारित है, वह भी बहुत कम है और उसे भी बढ़ाने की आवश्यकता है। गौरतलब है कि अपना दल की ओर से बीजेपी सरकार के सामने ये मांग तब रखी गई है, जब बीजेपी के एक और सहयोगी जदयू के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी बिहार के 10 राजनीतिक दलों के साथ जातिगत जनगणना की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर आए हैं।

देरी की कोई वजह नहीं- अनुप्रिया पटेल
अपना दल की प्रमुख और केंद्रीय वाणिज्य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने ईटी से बातचीत में कहा है कि वह एनडीए के विभिन्न मंचों और संसद में जाति आधारित जगणना पर जोर डालती रही हैं। उन्होंने कहा है कि वह हाल ही में इस मसले को पीएम मोदी के सामने भी उठा चुकी हैं, इसमें देरी की कोई वजह नहीं है। उन्होंने कहा है, 'ओबीसी जाति जनगणना बहुत पुरानी मांग है। 1990 में जब मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू की गई थी तो ओबीसी जातियों का हिसाब अनुमानों पर लगाया गया था। अब जातिगत जनगणना से बचने का कोई कारण नहीं है।' इसके लिए उन्होंने सितंबर 2018 में तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह की ओर से इस बारे में किए गए वादे का भी हवाला दिया है।

'पीएम को राजनीतिक दलों के मूड की जानकारी है'
गौरतलब है कि अगले साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव होना है और उसमें ओबीसी वोट सत्ताधारी भाजपा और उसकी सहयोगियों के लिए भी बहुत अहम है। पटेल का कहना है कि अभी जातियों की गिनती का आधार 1931 की जनगणना है, इसलिए 'सिर्फ जातिगत जनगणना से ही यह यह तय होगा कि किस पिछड़ी जाति को कितना आरक्षण मिलना चाहिए। अगर आरक्षण आबादी के हिसाब से मिलना है तो हमारी संख्या की गिनती जरूरी है।' हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि अंतिम फैसला पीएम पर छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा, '(पीएम को)उन्हें राजनीतिक दलों के मूड की जानकारी है। लगभग सभी पार्टियां इसकी मांग कर रही हैं। इस प्रस्ताव पर गंभीरता से लिया जाना चाहिए।'

क्रीमी लेयर की सीमा 15 लाख रुपये करने की मांग
इसके साथ ही उन्होंने केंद्र में ओबीसी के लिए अलग से मंत्रालय गठित करने की भी मांग की है। पटेल ने ओबीसी आरक्षण के लिए जातिगत जनगणना पर तो जोर दिया ही है, उन्होंने क्रीमी लेयर की सीमा को भी 8 लाख रुपये से 15 लाख रुपये सालाना करने की मांग की है। उनके मुताबिक संसदीय समिति ने पहले ओबीसी आरक्षण के लिए क्रीमी लेयर के मानदंड को 15 लाख रुपये तक बढ़ाने की सिफारिश की थी, लेकिन इसे तब 6 लाख रुपये से 8 लाख रुपये ही किया गया था।












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