PM Cares Fund: अनुपम खेर का Tweet-'उनके मुंह पर जोरदार तमाचा, जिन्हें साजिश लग रही थी'
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से पीएम केयर फंड से कोरोना वायरस के खिलाफ जंग के लिए 3100 करोड़ रुपये दिए जाने की बात कही गई, यह जानकारी सामने आने के बाद बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता अनुपम खेर ने ट्वीट करके बड़ी बात कही है,अनुपम खेर ने लिखा है कि एक जोरदार तमाचा उन सभी दुखी आत्माओं के चेहरों पर जिनको इस फंड में भी कोई साजिश नजर आ रही थी, अब इस थप्पड़ की गूंज सबको सुनाई देगी, जरूर सुनाई देगी।

'उनके मुंह पर जोरदार तमाचा, जिन्हें साजिश लग रही थी'
अभिनेता ने ट्वीट किया कि एक जोरदार तमाचा उन सभी दुखी आत्माओं के चेहरों पर जिनको इस फंड में भी कोई साजिश नजर आ रही थी।अब इस थप्पड़ की गूंज सबको सुनाई देगी। जरूर सुनाई देगी।#PMCaresFund.
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पीएम केयर्स फंड
मालूम हो कि प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार पीएम केयर्स फंड से 3100 करोड़ रुपये के आवंटन का निर्णय लिया गया है, इसमें से 2000 करोड़ रुपये की धनराशि 50 हजार वेंटिलेटर की खरीद के लिए रखी जा रही है, वहीं प्रवासी मजदूरों की देखभाल के लिए 1000 करोड़ रुपये का इस्तेमाल किया जाएगा, वहीं, कोरोना वायरस के लिए टीका विकसित करने में जुटे भारतीय वैज्ञानिकों की मदद के लिए 100 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
कांग्रेस नेता शशि थरूर को भी दिया था करारा जवाब
इससे पहले भी अनुपम खेर ने कांग्रेस नेता शशि थरूर को करारा जवाब दिया था, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने 'आत्मनिर्भर भारत' को 'मेक इन इंडिया' की री-पैकेजिंग करार दे दिया जिसके बाद अभिनेता अनुपम खेर ने उन्हें करारा जवाब दिया था।

'कोहनी पर टिके हुए लोग, टुकड़ों पर बिके हुए लोग'
दरअसल शशि थरूर ने आत्मनिर्भर ने ट्वीट किया था कि नए नाम से वही पुराना शेर बेच गए, सपनों के वो फिर से ढेरों ढेर बेच गए...' थरूर ने आखिर में पूछा कि मेक इन इंडिया अब आत्मनिर्भर भारत हो गया, कुछ और भी नया था क्या?, जिस पर अनुपम खेर ने लिखा था कि कोहनी पर टिके हुए लोग, टुकड़ों पर बिके हुए लोग! करते हैं बरगद की बातें, ये गमले में उगे हुए लोग!!' ट्वीट के आखिर में खेर ने स्माइली बनाकर माहौल को थोड़ा हल्का करने की भी कोशिश की।
प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए सहायता राशि का ऐलान
मालूम हो कि पीएम केयर फंड से 1000 करोड़ रुपये की सहायता राशि राज्यों को खास तौर पर प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए उपलब्ध कराई जाएगी, यह धनराशि राज्यों में जिला कलेक्टर व निगम आयुक्तों के खर्च के लिए होगी, जिसका इस्तेमाल वो मजदूरों के आवास, खाने, उपचार सुविधा और परिवहन के लिए कर सकेंगे।












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