मदरसा छात्र अब पढ़ेंगे एंटी-टेररिज़्म कोर्स

नई दिल्ली। देश में पहली बार दरगाह-ए-अल-हज़रत के तहत चलने वाले सुन्नियत जामिया रज़विया मंजर-ए-इस्लाम मदरसा में दो साल का एंटी-टेररिज़्म कोर्स पढ़ाया जाएगा। किसी भी मदरसे ने पहली बार इस तरह का कदम उठाया है, जहां आतंकवाद से संबंधित कोर्स पढ़ाया जाएगा। मदरसा शिक्षा को लेकर लग रहे आरोपों के बीच ऐसी पहल को एक अच्छा कदम है।

Madarsa

असल मायने समझाए जाएंगे

मुस्लिम विद्वानों ने बताया कि इस कोर्स में छात्रों को समझाया जाएगा कि कैसे आतंकवादी धार्मिक किताबों के मायनों को अपने मुताबिक बदलकर मासूम लोगों को भ्रमित करते हैं। इस कोर्स में आतंकवादी संगठनों का इतिहास, कौन से आतंकी संगठन भारत में सक्रिय हैं और कैसे वो गलत मायनों के ज़रिए लोगों को गलत राह पर धकेलते है, जैसे विषयों पर जानकारी दी जाएगी।

सही राह पर ले जाने का प्रयास

दरगाह-ए-अला हज़रत के प्रवक्ता मुफ्ती सलीम नूरी ने बताया कि दुनियाभर में आतंकी धार्मिक किताबों का गलत इस्तेमाल कर दहशत फैलाकर मासूमों को फंसा रहे हैं। सही जानकारी और आतंकियों की चाल को बेनकाब करने के लिए एंटी-टेररिज़्म कोर्स पढ़ाया जाएगा।

इस्लाम की बाकी धाराओं से होंगे वाकिफ़

इस कोर्स की रूपरेखा दरगाह मुफ्तियों के प्रमुख ने तैयार की है। इस कोर्स दो भाग में विभाजित किया गया है, एक सूफीवाद और दूसरा वहाबीवाद। दोनों भागों में अलग-अलग विषय पढ़ाए जाएंगे।

15 छात्र होंगे कोर्स का हिस्सा

इस कोर्स के लिए मदरसा प्रबंधन ने 22 से 26 साल के 15 छात्रों को चुना है। मदरसा में ये 15 छात्र मुफ्ती बनने के लिए पढ़ाई कर रहे हैं। दरगाह के प्रवक्ता नूरी ने बताया कि इस्लाम में मुफ्ती ख़ास पद होता है। इसके मद्देनज़र इन छात्रों को तैयार किया जा रहा है ताकि भविष्य में समाज को सही राह दिखा सकें।

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