Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

लखनऊ पोस्टर केस: योगी सरकार को झटका, सुप्रीम कोर्ट का हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार

लखनऊ। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपियों के खिलाफ यूपी सरकार ने सख्त रवैया अपनाया था। पिछले दिनों राजधानी लखनऊ में जगह-जगह वसूली के पोस्टर्स लगा दिए गए थे, जिसपर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ऐतराज जताया था। हाईकोर्ट ने इन पोस्टर्स को हटाने का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस मामले पर बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार को फटकार लगाते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

Recommended Video

    Lucknow Poster: Supreme Court ने High Court के Order पर रोक लगाने से किया इनकार | वनइंडिया हिंदी
    Anti CAA protest: recovery posters yogi government supreme court

    सुप्रीम कोर्ट ने ये मामला तीन जजों की बेंच को भेज दिया है। जस्टिस उमेश उदय ललित और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अवकाशकालीन ने इस मामले को बड़ी बेंच को भेजने का फैसला सुनाया। इसके पहले याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी कानून राज्य सरकार के इस एक्शन को सही नहीं कहता है। इस सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 95 लोग शुरुआती तौर पर पहचाने गए थे, उनकी तस्वीरें होर्डिंग्स पर लगाई गईं, इनमें से 57 पर आरोप के सबूत भी हैं।

    तुषार मेहता ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान बंदूक चलाने वाला व्यक्ति और हिंसा में कथित रूप से शामिल होने वाला निजता के अधिकार का दावा नहीं कर सकता। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार के पोस्टर लगाने के फैसले पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि हम राज्य की चिंता को समझ सकते हैं लेकिन इस फैसले को सही ठहराने के लिए कोई कानून नहीं है।

    पूर्व आईपीएस एसआर दारापुरी की तरफ से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने कहा, 'वे 72 बैच के आईपीएस अफसर हैं जो आईजी के पद पर रहते हुए रिटायर हुए थे।' चाइल्ड रेपिस्ट और हत्यारों का उदाहरण देते हुए सिंघवी ने कहा कि यदि इस तरह की पॉलिसी है तो सड़कों पर चलने वाले व्यक्ति को लिंच किया जा सकता है।

    इसके पहले, लखनऊ में लगे पोस्टर्स के मामले का इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सरकार लोगों की निजता और जीवन की स्वतंत्रता के मूल अधिकारों पर अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

    More From
    Prev
    Next
    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+