अन्ना हजारे के आंदोलन को गुरुद्वारा बंगला साहिब से मिल रही ऊर्जा
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। अन्ना हजारे का जंतर-मंतर पर धरना चल रहा है। दिन भर अन्ना के साथ धरने पर बैठे लोगों में भी गजब की ऊर्जा दिख रही है। पर यह ऊर्जा आ कहां से रही है? उत्तर है गुरुद्वारा बंगला साहिब! जी हां आंदोलन में शामिल होने के लिये आये सैंकड़ों लोग इस पेटपूजा के लिये जंतर-मंतर के करीब स्थित गुरुद्वारे में जा रहे हैं।
सिखों के बेहद खास और ऐतिहासिक गुरुद्वारा बंगला साहिब में लंगर का सेवन करने वालों की तादाद बढ़ गई है। दरअसल इधर आकर धरना देने वालों को गुरुद्वारा बंगला साहिब पेट-पूजा करने के लिहाज से बहुत मुफीद जगह लगती है। वे इधर आकर भरपेट भोजन करते हैं। लंगर दिन-रात चलता है।
दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमेटी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी बलबीर सिंह ने बताया कि जंतर-मंतर पर पहले भी जब अन्ना का धरना चला तो उनके यहां पर लंगर करने वाले आते रहे। उन्होंने बताया कि गुरुद्वारा तो गुरुघर हैं। यहां पर सबके लिए दरवाजे हर वक्त खुले रहते हैं। जंतर-मंतर से गुरुद्वारा बँगला साहिब बेहद करीब है।
स्वर्ण मंदिर की तरह है यह गुरुद्वारा
बता दें कि गुरुद्वारा बँगला साहिब का महत्व अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की तरह है। सिख धर्म के आठवें गुरु- गुरु हरकिशन जी महाराज ने यहाँ विश्राम किया था। तब यह राजा जय सिंह का बंगला हुआ करता था। उस समय दिल्ली में चेचक की बीमारी फैली हुई थी। गुरु हरकिशन महाराज ने सभी पीड़ितों का इलाज किया। जिसकी चपेट में आने से इनकी मृत्यु हो गई थी।
कहते हैं कि यहां लंगर में खाना खाने का मौका नहीं गंवाना चाहिए। गुरुद्वारे में प्रसाद तो मिलेगा ही, लंगर के खाने को भी प्रसाद ही माना जाता है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी से जुड़े हुए के.एस.गुजराल बताते हैं कि गुरुद्वारा 24 घंटे खुला रहता है और कोई भी श्रद्धालु यहां आ सकता है। लंगर में दाल,सब्जी,रोटी मिलती है। बीच-बीच में मिष्ठान की भी व्यवस्था रहती है।
सिख समेत अन्य धर्म के लोगों में भी गुरुद्वारा बंगला साहिब के प्रति विशेष श्रद्धा है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ मत्था टेकने आते हैं। ये यहां पर लंगर भी चखते हैं। जानकारों का कहना है कि जंतर-मंतर के इस गुरुघर के करीब होने से धरना देने से लेकर आंदोलनकारियों को बहुत राहत मिल जाती है।













Click it and Unblock the Notifications