राजपूतों की नाराजगी ने राजस्थान में बीजेपी के लिए हालात किए और मुश्किल
नई दिल्ली। राजस्थान में बीजेपी के लिए मुश्किलें खत्म नहीं हो रही हैं। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को पहले से ही गजेंद्र सिंह शेखावत को मोदी सरकार में मंत्री बनाने का विरोध करने और एक राजपूत गैंगस्टर के एनकाउंटर के चलते विरोध झेलना पड़ रहा था और अब मानवेंद्र सिंह के कांग्रेस में शामिल होने से पार्टी को एक और झटका लगा है। अटल सरकार में विदेश मंत्री रहे जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह के कांग्रेस में शामिल होने से राज्य के मारवाड़ इलाके, जैसे बाड़मेर, जैसलमेर और जोधपुर पर असर पड़ेगा क्योंकि इन जिलों में राजपूत समुदाय का ज्यादा प्रभाव है। यहां राजपूतों के अलावा सिंधी और मुसलमान समुदाय का भी जसवंत सिंह के परिवार को समर्थन हासिल है।

मारवाड़ इलाके से इस वक्त राजपूत समुदाय के आठ विधायक हैं जबकि राज्य विधानसभा में कुल 26 राजपूत विधायक हैं। मानवेंद्र के कांग्रेस खेमे में आने से वो अब राज्य में राजपूत वोटों को कांग्रेस के पाले में लाने में मदद करेंगे। राज्य में राजपूतों की आबादी कुल 7 प्रतिशत है।

मानवेंद्र ने राजपूत-वर्चस्व वाले क्षेत्रों का दौरा करना शुरू कर दिया है और वो हाल ही में बीकानेर और जोधपुर गए थे। दरअसल राजपूत समुदाय वसुंधरा राजे से खुश नहीं है और कांग्रेस के पास राज्य में इस समुदाय से कोई बड़ा चेहरा नहीं है। लेकिन मानवेंद्र सिंह के कांग्रेस में शामिल होने से जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर और नागौर में पार्टी के समीकरण बदल जाएंगे और बीजेपी के लिए हालात और मुश्किल बन जाएंगे।

सूत्रों का कहना है कि राजपूत समुदाय के एक वर्ग में रावणा राजपूत समुदाय के आनंद पाल के एनकाउंटर को लेकर गुस्सा है। पार्टी ने इसे शांत करने की कोशिश की लेकिन कुछ खास नहीं हो पाया और हाल के कुछ मामलों में बीजेपी के रवैये ने राजपूतों को उससे और दूर कर दिया। रावणा राजपूत के अलावा रॉय राजपूत, जिससे बीजेपी की विधायक दीया कुमारी आती हैं, उन्होंने ने भी वसुंधरा राजे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दवाब के चलते मजबूरी में वसुंधरा को उनका सील किया गया महल खोलना पड़ा। शाही परिवार का समर्थन करने वाले राजपूतों ने इसे पूरे घटनाक्रम को समुदाय पर हमले के तौर पर लिया। राज्य के कई सामाजिक संगठनों ने कांग्रेस को को समर्थन देने की बात कही है इससे भी बीजेपी के लिए चिंता बढ़ गई है।
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