चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ हत्या के प्रयास मामले में सुनवाई की पूरी, हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
पूर्व मुख्यमंत्री व टीडीपी प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू (N Chandrababu Naidu) को 9 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। जिसके बाद से इस कार्रवाई का टीडीपी (TDP) लगातार विरोध कर रही है। टीडीपी प्रमुख के हिरासत की अवधि बढ़ाने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया है। वहीं उनके खिलाफ दर्ज हत्या हत्या के प्रयास और दंगा भड़काने के मामले में हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर ली है। मामले में अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा है।
371 करोड़ रुपए के कथित स्किल डेवलपमेंट घोटाला मामले में गिरफ्तार किए जाने के बाद टीडीपी प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। उनकी हिरासत की अवधि बढ़ाने जाने के बाद उन्होंने जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस हफ्ते सोमवार (25 सितंबर) को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सीआईडी की ओर से उनके खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने के लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया।
वहीं अब पिछले साल यानी 2020 में अन्नामय्या पुलिस थाने में नायडू के खिलाफ दर्ज हत्या के प्रयास और दंगा भड़काने के मामले में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर ली है। अदालत ने मामले में फैसला अगले दो दिनों के लिए सुरक्षित रखा है।

क्या है मामला?
तेलंगाना के पूर्व सीएम एन चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ वर्ष 2022 में हत्या के प्रयास और दंगा भड़काने के मामले में केस दर्ज किया गया था। मामला अन्नामय्या का है। जहां चंद्रबाबू नायडू की पार्टी ओर से निकाली गई एक जनसंपर्क यात्रा के दौरान टीडीपी और वाईएसआरसीपी कार्यकर्ता के बीच झड़प हुई थी। इस घटना के बाद अन्नामय्या जिला पुलिस ने चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर में चंद्रबाबू के साथ 20 अन्य लोगों के भी नाम हैं। ये मामला वाईएसआरसीपी नेता उमापति रेड्डी ने मुदीवेडु पुलिस स्टेशन में दर्ज कराया था। जिसमें उन्होंने पुंगनूर में दंगों के पीछे एक साजिश का आरोप लगाया था। एफआईआर में चंद्रबाबू का नाम A1 कर दिया गया है। ए2 के रूप में देवीनेनी उमा और ए3 के रूप में अमरनाथ रेड्डी के नाम जोड़े गए।












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