आखिर क्यों इतना कठिन है अनंतनाग ऑपरेशन? दुर्गम पहाड़ियों में आंतकियों से लड़ रहे सेना के जवान
Anantnag Operation: पिछले चार दिनों से जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिले में आतंकियों और सुरक्षा बलों के बीच ऑपरेशन जारी है। आतंकियों को घाटी से खदेड़ने के लिए सेना तत्पर है। सुरक्षा बल पूरी तैयारियों के साथ भारत माता की रक्षा के लिए आतंकियों को खोजने में जुटे हुए हैं। आतंकियों की हरकत पर पैनी नजर रखी जा रही है।
चार दिनों से जारी ऑपरेशन
लेकिन इस बीच एक सवाल जो सबके मन में उमड़ रहा है कि आखिर क्यों ये ऑपरेशन पिछले चार दिनों से जारी है? आखिर क्यों ये मुश्किल सा लग रहा है? इतनी बड़ी सेना और सैन्य ताकत होने के बाद भी चंद आतंकियों को मार क्यों नहीं गिराया जा रहा? तो चलिये जानते हैं सेना के आड़े आ रही मुश्किलों और ऑपरेशन के चार दिनों तक चलते रहने के कारण के बारे में...

तीन जवानों को देनी पड़ी शहादत
सुरक्षा बल आतंकवादियों की हरकतों पर न सिर्फ जमीन बल्कि आसमान से भी नजर रख रहे हैं। लेकिन दिल तोड़ने वाली खबर तब सामने आई जब पता लगा कि आतंकियों को पछाड़ते हुए देश के तीन जवानों को अपनी शहादत देनी पड़ी। आज यानी चौथे दिन भी आतंकियों के खिलाफ ये ऑपरेशन जारी है। ये ऑपरेशन काफी मायनों में अहम और मुश्किल दोनों ही है।
आखिर क्यों मुश्किल ये ऑपरेशन?
दरअसल, आतंकी अनंतनाग की दुर्गम और ऊंची-ऊंची पहाड़ियों का फायदा उठाकर सैनिकों पर गोलियां दाग रहे हैं। आज सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच की इस मुठभेड़ का चौथा दिन है। लेकिन इस बीच ये समझना बेहद जरूरी है कि जिस जगह ये ऑपरेशन चल रहा है, उस जगह यानी कोकरनाग इलाके की स्थिति इतनी जटिल है कि आतंकियों के खिलाफ किसी भी ऑपरेशन को अंजाम देना बेहद मुश्किल है।
अनंतनाग के कोकरनाग इलाके की भौगोलिक स्थिति:
- कोकरनाग की जमीनी स्थिति बेहद जटिल हैं।
- पहाड़ियां बड़े-बड़े और घने पेड़ों से ढकी हुई हैं।
- इलाके में पेड़ों के अलावा ऊंची चट्टानें और पहाड़ियां मौजूद हैं।
- पहाड़ियों के ऊपर पहले से ही डेरा जमकर बैठे हैं आतंकी।
2000 सैनिकों ने संभाला मोर्चा
आज सेना और आतंकियों के बीच मुठभेड़ का चौथा दिन है। 45 किलोमीटर के हिस्से में फैले इस इलाके में ऊंचे पहाड़ लगातार सेना के लिए चुनौती बने हुए हैं। अब आतंकियों को ढेर करने के लिए तकरीबन 2000 सैनिकों ने मोर्चा संभाला हुआ है। जहां भी सेना को शक हो रहा है, ब्लास्ट किए जा रहे हैं, ताकि आतंकियों को उनकी असली जगह दिखाई जा सके।
दहशतगर्दों पर सेना की पैनी नजर
स्थानीय लोगों की मानें तो उनका कहना है कि सुबह गोलियों की गड़गड़ाहटों की आवाज सुनाई पड़ी। लोग भी काफी सहम गए थे कि इस इलाके की ऊंची पहाड़ियों में आतंकियों ने डेरा बनाया हुआ है। अब सबकी नजरें सेना की ताकत और अपने जवानों की शहादत का बदला लेने के उस पल पर टिकी हुई है, जब दहशतगर्दों को ढेर किया जाएगा।












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