आनंद महिंद्रा ने अग्निवीरों को रोजगार देने का किया ऐलान, हिंसक प्रदर्शन पर जताया दुख
नई दिल्ली, 20 जून। देशभर में जिस तरह से सेना में भर्ती की नई योजना अग्निपथ का विरोध हो रहा है और कई जगहों पर हिंसक प्रदर्शन हुआ उसपर महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने दुख जाहिर किया है। इसके साथ ही उन्होंने ऐलान किया है कि वह प्रशिक्षित और सक्षम अग्निवीरों को भर्ती करेंगे। ट्विटर पर एक ट्वीट करके आनंद महिंद्रा ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने ट्वीट करके लिखा, मैं अग्निपथ स्कीम को लेकर हो रही हिंसा को लेकर दुखी हूं। जब पिछले साल स्कीम का विचार सामने आया था तो मैंने कहा था कि अनुशासित और सक्षम अग्निवीरों को रोजगार के योग्य बनाएगा। महिंद्रा समूह ऐसे प्रशिक्षित, सक्षम युवाओं की भर्ती के अवसर का स्वागत करता है।

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कई जगहों पर हिंसक प्रदर्शन
गौर करने वाली बात है कि अग्निपथ भर्ती योजना के तहत युवाओं को सेना में 4 साल के लिए भर्ती किया जाएगा। इस योजना का ऐलान 14 जून को किया गया था। इस योजना के ऐलान के बाद से ही इसका भारी विरोध हो रहा है, युवा सड़ पर इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली, यूपी, बिहार, हरियाणा, तेलंगाना, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, पंजाब, झारखंड, असम में इस योजना के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हुआ। कुछ जगहों पर प्रदर्शन काफी उग्र हो गया, प्रदर्शनकारियों ने ट्रेनों में आग लगा दी, बसों को फूंक दिया, कई गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचाया।
सवा लाख अग्निवीरों की होगी भर्ती
तकरीबन 46000 अग्निवीरों को सेना में भर्ती किया जाएगा, लेकिन एक शीर्ष सेना के अधिकारी ने बताया कि आने वाले भविष्य में यह भर्ती 1.25 लाख युवाओं के लिए होगी। इस भर्ती के लिए युवा की न्यूनतम आयु 17.5 साल होनी चाहिए, जबकि अधिकतम उम्र 21 वर्ष होनी चाहिए। हालांकि इस साल अधिकतम उम्र को बढ़ाकर 23 साल कर दिया गया है। गौर करने वाली बात है कि पिछले दो साल से सेना में भर्ती की प्रकिया रुकी हुई थी, ऐसे में जिस तरह से सिर्फ 4 साल के लिए अग्निवीरों की भर्ती की योजना का ऐलान किया गया है, उससे युवाओं में काफी नाराजगी है।
सरकार ने बताया सुनहरा अवसर
हालांकि सरकार का कहना है कि अग्निपथ योजना युवाओं के लिए सेना में भर्ती होने का सुनहरा अवसर है, वह सेना में भर्ती होकर देश की सेवा कर सकते हैं। लेकिन कांग्रेस इस भर्ती का विरोध कर रही है और इसकी आलोचना कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि इस भर्ती योजना में कई सारे जोखिम हैं, यह सेना की लंबे समय से चली आ रही परंपरा को खत्म करेगी, इस योजना के तहत इस बात की गारंटी नहीं होगी कि जो सैनिक इसके जरिए भर्ती किए जाएंगे वह बेहतर तरह से प्रशिक्षित किए जाएंगे और देश की सेवा के लिए प्रेरित होंगे।












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