रेप पर ट्वीट करने की वजह से कश्‍मीर के IAS ऑफिसर को मिला सरकारी नोटिस

कश्‍मीर के एक आईपीएस ऑफिसर को उनके एक ट्वीट की वजह से सरकारी नोटिस मिला है। इस ऑफिसर ने साल 2010 में सिविल सर्विजेस एग्‍जाम में टॉप किया था। इस ऑफिसर की ओर से कहा गया है कि शुक्रवार को सरकार की ओर से अप्रैल में उनकी एक ट्वीट पर सरकार की ओर से नोटिस भेजा गया है।

श्रीनगर। कश्‍मीर के एक आईपीएस ऑफिसर को उनके एक ट्वीट की वजह से सरकारी नोटिस मिला है। इस ऑफिसर ने साल 2010 में सिविल सर्विजेस एग्‍जाम में टॉप किया था। इस ऑफिसर की ओर से कहा गया है कि शुक्रवार को सरकार की ओर से अप्रैल में उनकी एक ट्वीट पर सरकार की ओर से नोटिस भेजा गया है। इस ऑफिसर का नाम शाह फैसल है और उन्‍होंने अपनी मां का बलात्‍कार करने वाले एक व्‍यक्ति की स्‍टोरी पर कमेंट करते हुए ट्वीट किया था।

बॉस ने भेजा लव लेटर

बॉस ने भेजा लव लेटर

फैसल ने इस बारे में एक फेसबुक और ट्विटर पर लिखा और इसमें कहा है, 'मुझे मेरे बॉस की तरफ से साउथ एशिया में रेप कल्‍चर पर मेरी व्‍यंगात्‍मक ट्वीट के लिए लव लेटर मिला है।' उन्‍होंने बताया कि उन्‍हें जम्‍मू और कश्‍मीर सरकरार के जनरल डिपार्टमेंट से आधिकारिक चिट्ठी हासिल हुई है। इस चिट्ठी कहा गया है कि केंद्र सरकार के पर्सनल एंड ट्रेनिंग डिपार्टमेंट की ओर से फैसल के खिलाफ उनकी ट्वीट पर कार्रवाई करने को कहा गया है। इस चिट्ठी में उनकी ट्वीट के स्‍क्रीनशॉट्स भी अटैच्‍ड हैं जिनमें आरोप लगाया है कि फैसल ने सर्विस रूल्‍स का उल्‍लंघन किया है।

क्‍या है नोटिस में

क्‍या है नोटिस में

मंगलवार को फैसल को भेजे गए इस नोटिस में कहा गया है कि वह ईमानदारी और अखंडता के साथ अपनी अधिकारिक ड्यूटी को निभाने में असफल रहे हैं और उनका व्यवहार ऐसा है जो इस बात को साबित करता है कि वह जनसेवक के लायक नहीं हैं। उन्‍हें 15 दिनों के अंदर इस पूरे मुद्दे पर इस चिट्ठी के मिलने के बाद एक सकारात्‍मक तरीके से अपनी स्थिति को स्‍पष्‍ट करने के लिए कहा जाता है। डिपार्टमेंट की ओर से कहा गया है कि ट्वीट में उन्‍होंने जो विचार व्यक्त किए हैं, वह अखिल भारतीय सेवा अधिनियम 1968 और अखिल भारतीय सेवा अनुशासन व अपील नियम 1969 के खिलाफ हैं। आपके खिलाफ राज्य सरकार को कार्रवाई करने और आपको सूचित करने के लिए कहा गया है।

इस समय विदेश में हैं फैसल

इस समय विदेश में हैं फैसल

फैसल इस समय स्‍टडी लीव के लिए विदेश में हैं। उन्‍होंने एक ट्वीट के जरिए ही इसका जवाब दिया। उन्‍होंने कहा है कि विडंबना यह है कि लोकतांत्रिक भारत में उपनिवेशवादी भावना के साथ सेवा नियम लागू हैं जो जमीर की आजादी को मारते हैं। शाह फैसल ने जीएडी की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह अति उत्साही नौकरशाही के सिवाय कुछ नहीं है। यह वह लोग हैं जो आज भी सेवा नियमों के बरसों पुराने दौर के मुताबिक व्याख्या करते हैं। उन्‍होंने कहा कि एक अधिकारी होने के नाते उन्‍हें नहीं लगता कि उनके ट्वीट पर किसी तरह की कार्रवाई होनी चाहिए। फैसल का कहना है कि रेप कोई सरकारी नीति तो है नहीं, जिसकी आलोचना या निंदा को सरकारी नीतियों की निदां माना जाए।

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