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    रायबरेली में कांग्रेस को घेर पाएंगे अमित शाह?

    By Bbc Hindi
    रायबरेली में कांग्रेस को घेर पाएंगे अमित शाह?

    उत्तर प्रदेश ही नहीं देश भर में वीआईपी सीट और कांग्रेस का गढ़ समझी जाने वाली रायबरेली लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी अब कांग्रेस को सीधे चुनौती देने की तैयारी में है.

    बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह शनिवार को कुछ उसी अंदाज़ में रायबरेली में दस्तक दे रहे हैं जिस तरह से उन्होंने कुछ महीने पहले अमेठी में दी थी.

    अमित शाह के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय और तमाम दूसरे नेता भी रायबरेली आ रहे हैं.

    रायबरेली में कार्यकर्ताओं से मुलाक़ात के अलावा अमित शाह एक रैली को भी संबोधित करेंगे.

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    रायबरेली में कांग्रेस को घेर पाएंगे अमित शाह?

    रायबरेली कांग्रेस की सबसे ताक़तवर नेता और पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी का संसदीय क्षेत्र है, लेकिन उनकी पार्टी के ही कुछ नेता अब कांग्रेस से नाराज़ होकर बीजेपी का दामन थामने जा रहे हैं.

    अमित शाह के दौरे से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी के एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह ने पूरी पार्टी पर हमला बोलते हुए प्रियंका गांधी को भी नहीं बख़्शा.

    दिनेश सिंह ने आरोप लगाया कि प्रियंका गांधी की वजह से उन्हें विधानसभा का टिकट नहीं मिला और अपने भाई के लिए हरचंदपुर विधानसभा सीट के टिकट के बदले प्रियंका गांधी ने उनसे एमएलसी की सीट से इस्तीफ़ा लिखवाकर रख लिया था.

    हालांकि कांग्रेस पार्टी दिनेश सिंह के आरोपों से किनारा कर रही है और इन आरोपों को बहुत तवज्जो भी नहीं दे रही है.

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    कौन हैं दिनेश प्रताप?

    एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह इससे पहले समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी में भी रह चुके हैं.

    उनके एक भाई राकेश सिंह इस समय कांग्रेस पार्टी से ही हरचंदपुर विधान सभा से विधायक हैं तो एक अन्य भाई रायबरेली ज़िला पंचायत के अध्यक्ष हैं.

    उनके बग़ावती तेवरों के चलते कांग्रेस पार्टी ने फ़िलहाल उन्हें निकाल दिया है.

    पार्टी प्रवक्ता द्विजेंद्र त्रिपाठी कहते हैं कि उनके जाने से कांग्रेस और मज़बूत होगी क्योंकि रायबरेली के आम कांग्रेसी उनसे परेशान थे.

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    संदेश देने की तैयारी

    दरअसल, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पिछले दिनों जब लखनऊ में पार्टी नेताओं के साथ बैठक करने के मक़सद से आए थे तो उसी वक़्त इस बात की बड़ी चर्चा थी कि दिनेश सिंह सपरिवार बीजेपी में शामिल हो सकते हैं.

    लेकिन अपनी ही पार्टी के दलित सांसदों के बग़ावती तेवर और क़ानून व्यवस्था पर हर दिन राज्य सरकार पर उठ रही उंगली के चलते अमित शाह दिन भर मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक में ही व्यस्त रहे.

    हालांकि, बताया ये भी जा रहा है कि कांग्रेस के एक एमएलसी, एक विधायक और एक ज़िला पंचायत अध्यक्ष की हैसियत वाले परिवार को अमित शाह लखनऊ की बजाय रायबरेली में ही पार्टी में शामिल कराना चाहते थे ताकि उसके ज़रिए वो एक बड़ा संदेश दे सकें.

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    वोटरों का क्या है रुझान?

    लेकिन वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्र इसे बहुत सूझ-बूझ वाली रणनीति नहीं मानते, "दिनेश प्रताप सिंह ऐसा बड़ा नाम नहीं है जिसे पार्टी में शामिल कराने के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आएं. दूसरे दिनेश सिंह और उनका परिवार बीजेपी के लिए एक बोझ ही साबित होगा क्योंकि एक तो वोटों के लिहाज़ से उनकी वो हैसियत नहीं है कि बीजेपी उनकी वजह से सोनिया गांधी या कांग्रेस को रायबरेली में कोई नुक़सान पहुंचा सके, दूसरे उनका परिवार पूरे पांच साल सरकार से कुछ न कुछ पाने की इच्छा रखेगा और सरकार को परेशान करेगा."

    योगेश मिश्र कहते हैं कि ऐसे समय में जबकि राज्य सरकार ही नहीं बल्कि केंद्र सरकार पर भी चौतरफ़ा हमले हो रहे हैं, अमित शाह सोनिया गांधी जैसी बड़ी नेता को चुनाव हराने की रणनीति में लगे हैं, ये कोई समझदारी भरा फ़ैसला नहीं है.

    बकौल योगेश मिश्र, राजनीति में विरोधियों को हराना लोकतंत्र की ख़ूबी है, लेकिन विरोधियों का राजनीतिक सफ़ाया करने की नीयत रखना कभी भी स्वस्थ परंपरा के तौर पर नहीं देखा गया है.

    योगेश मिश्र की तरह रायबरेली के कुछ आम लोग भी ऐसा ही सोचते हैं.

    स्थानीय निवासी रमेश बहादुर कहते हैं, "रायबरेली की जो भी पहचान है, वह कांग्रेस पार्टी और सोनिया गांधी, इंदिरा गांधी की वजह से है. इन लोगों ने रायबरेली को बहुत कुछ दिया है. रायबरेली की जनता इतनी जल्दी ये सब नहीं भूल पाएगी."

    मुश्किल चुनौती

    रायबरेली के स्थानीय पत्रकार माधव सिंह कहते हैं, "अमेठी में बीजेपी ने पूरी ताक़त झोंक दी लेकिन वो 2014 में भी कांग्रेस को नहीं हरा पाई. रायबरेली तो उससे भी मज़बूत गढ़ रहा है, सोनिया गांधी और इंदिरा गांधी ने यहां की जनता की भलाई और क्षेत्र के विकास के लिए बहुत कुछ किया है. 2019 को चुनाव में तो मौजूदा केंद्र सरकार का भी जनता मूल्यांकन करेगी."

    माधव सिंह कहते हैं कि दो दिन पहले सोनिया गांधी क़रीब डेढ़ साल बाद अपने चुनावी क्षेत्र में आई थीं लेकिन लोगों का उत्साह ये बता रहा था कि फ़िलहाल रायबरेली में उन्हें या उनके रहते कांग्रेस को चुनौती देना कितना मुश्किल है.

    वहीं, दिनेश सिंह के बीजेपी में सपरिवार शामिल होने की आहट मिलते ही पार्टी में विरोध के स्वर भी सुनाई देने लगे हैं. तमाम कार्यकर्ताओं ने उनके और उनके भाइयों के ख़िलाफ़ बीजेपी दफ़्तर के बाहर नारेबाज़ी की.

    बताया जा रहा है कि रायबरेली के बीजेपी कार्यकर्ता और नेता उनको पार्टी में शामिल किए जाने से बेहद नाराज़ हैं. ऐसे में पार्टी को अपने भीतर ही कड़े विरोध का सामना भी पड़ सकता है.

    लेकिन सवाल ये है कि जब पार्टी का मुखिया ही उन्हें सपरिवार अपनाने के लिए आ रहा है तो कार्यकर्ताओं के आगे और कौन सा रास्ता बचेगा ?

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    English summary
    Amit Shah will be surrounded by Congress in Rae Bareli

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