अमित शाह बोले, 'वक्त आ गया है कि अब देश का सही इतिहास फिर से लिखा जाए'

अमित शाह ने कहा, इतिहास लिखने की जिम्मेदारी उन्हीं लोगों के हाथों में थी, जिन्होंने गलतियां की और इसका परिणाम ये हुआ कि तथ्यों की सच्चाई छिपाई गई...

नई दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद इतिहास लेखन को लेकर बड़ा बयान दिया है। अमित शाह ने कहा कि अब समय आ गया है कि देश का सही इतिहास फिर से लिखा जाए। पूर्व सिविल सेवा अधिकारी मंच की ओर से नेहरू मेमोरियल में आयोजित कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा, 'आज भी अनुच्छेद 370 और कश्मीर को लेकर कई तरह की अफवाहें चल रही हैं और उन्हें स्पष्ट करना बहुत जरूरी है। हम जानते हैं कि 1947 से कश्मीर चर्चा और विवाद का विषय रहा है लेकिन लोगों के सामने इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया।'

'जिन्होंने गलतियां की, उन्होंने ही इतिहास लिखा'

'जिन्होंने गलतियां की, उन्होंने ही इतिहास लिखा'

अमित शाह ने कहा, 'चूंकि इतिहास लिखने की जिम्मेदारी उन्हीं लोगों के हाथों में थी, जिन्होंने गलतियां की थीं और इसका परिणाम ये हुआ कि तथ्यों की सच्चाई छिपाई गई। मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि इतिहास को सही तरीके से लिखा जाए और लोगों के सामने रखा जाए।' गृह मंत्री ने आगे कहा, 'कश्मीर में सूफी संतों की संस्कृति नष्ट हो गई, उस वक्त ये मानवाधिकार के चैंपियन कहां थे? जब कश्मीरी पंडितों को उस क्षेत्र से बाहर निकाल दिया गया तो तब वो कहां थे? अनुच्छेद 370 की वजह से कश्मीर को नुकसान बहुत उठाना पड़ा है।'

'नेहरू ने हिमालय से भी बड़ी गलती की'

'नेहरू ने हिमालय से भी बड़ी गलती की'

कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा, 'हमारी सरकार ने सुनिश्चित किया और जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव हुए, जिसके बाद से 40 हजार ग्राम प्रधान विकास के लिए काम कर रहे हैं। अगले 4-5 दिनों में तहसील और जिला पंचायत के चुनाव होंगे। राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत प्रणाली पूरी तरह कार्यात्मक होगी। जवाहर लाल नेहरू के गलत समय पर लिए गए युद्धविराम की घोषणा के फैसले के कारण पीओके का निर्माण हुआ। 1948 में संयुक्त राष्ट्र में जाने का उनका निर्णय एक बहुत बड़ी गलती थी। वो हिमालय से भी बड़ी गलती थी।'

'जम्मू कश्मीर के लिए देश को इंतजार करना पड़ा'

'जम्मू कश्मीर के लिए देश को इंतजार करना पड़ा'

गृह मंत्री ने कहा, 'आजादी के समय 630 रियासतों को एक करने में कोई समस्या नहीं आई, लेकिन जम्मू कश्मीर को एक करने के लिए देश को 5 अगस्त 2019 तक का इंतजार करना पड़ा। जब कोई देश आजाद होता है तो उसके सामने कई प्रश्न होते हैं, उसके सामने सुरक्षा का प्रश्न होता है, उसके सामने संविधान के निर्माण का प्रश्न होता है, इस तरह के कई प्रश्न उस देश के सामने होते हैं, लेकिन हमारे सामने 630 रियासतों को एक करने का प्रश्न था। ये सरदार वल्लभ भाई पटेल ही थे, जिनकी वजह से 630 रियासतें एक हो पाईं।'

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