NRC पर बोले अमित शाह- इससे एक भी नागरिक को खतरा नहीं लेकिन एक भी घुसपैठिया नहीं बचेगा
नई दिल्ली। संशोधित नागरिकता कानून को लेकर देश में सियासी घमासान छिड़ा है। अधिकांश विपक्षी दल इस कानून को मुस्लिम विरोधी बताते हुए मोदी सरकार पर हमले कर रहे हैं। वहीं, एनआरसी को लेकर भी विपक्ष लगातार पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर निशाना साध रहा है। इस बीच, एनआरसी को लेकर विपक्ष के आरोपों पर अमित शाह ने कहा है कि एनआरसी में धर्म के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं होनी है।

एक-एक घुसपैठिए को देश के बाहर किया जाएगा- शाह
आजतक के कार्यक्रम में अमित शाह ने संशोधित नागरिकता कानून और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) पर बात की। शाह ने स्पष्ट किया कि एनआरसी में धर्म के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं होनी है। अमित शाह ने कहा कि एनआरसी के तहत भारत के एक भी नागरिक की नागरिकता नहीं जाएगी, लेकिन एक भी घुसपैठिया नहीं बचेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि एनआरसी केवल मुस्लिमों के लिए नहीं है।

कांग्रेस अपने ही बनाए कानून पर हमसे सवाल कर रही है- शाह
एनआरसी पर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता बताएं कि जब 1985 में असम समझौता हुआ तो पहली बार एनआरसी स्वीकार की गई थी, 1955 सिटीजनशिप एक्ट के क्लॉज 14 में 3 दिसंबर 2004 को इसे जोड़ा गया था। इसके बाद 9 नवंबर 2009 को रूल-4 को जोड़ा गया, जो एनआरसी बनाने की शक्ति देता है। शाह ने कहा कि इस दौरान कांग्रेस की ही सरकार थी। अब कांग्रेस अपने ही बनाए कानून पर हमसे सवाल कर रही है, क्या कांग्रेस ने शो केस में रखने के लिए ये कानून बनाया था।

शाह ने नेहरू-लियाकत समझौते का जिक्र किया
वहीं, नागरिकता कानून को एनआरसी के साथ जोड़कर देखने के सवाल पर शाह ने कहा कि देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ जो कि नहीं होना चाहिए था। शाह ने नेहरू-लियाकत समझौते का जिक्र किया जिसमें दोनों देशों के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर समझौता हुआ था। शाह ने कहा कि अब पाकिस्तान में केवल 3 फीसदी हिंदू रह गए हैं, बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की संख्या कम हो गई है। अगर समझौते के मुताबिक काम हुआ होता तो आज इस कानून को लाने की जरूरत नहीं पड़ती।












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