Ameen Sayani ने रखा रेडियो को जवान, अनाम प्रेमी ने बताई आवाज के जादूगर की खासियत, Exclusive
Ameen Sayani (वनइंडिया Exclusive): 'नमस्कार भाइयों और बहनों, मैं आपका दोस्त अमीन सयानी बोल रहा हूं' ... लोगों के दिलों पर दस्तक देने वाली ये आवाज अब सदा के लिए खामोश हो गई। देश के मशहूर रेडियो जॉकी और 'पद्मश्री' से सम्मानित अमीन सयानी अब हमारे बीच नहीं हैं।

91 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले अमीन सयानी अपने आप में एक संपूर्ण किताब थे और उनकी आवाज ही उनकी पहचान थी। 42 साल तक 'बिनाका गीतमाला' के जरिए लोगों को मनोरंजित करने वाले सयानी एक ऐसा चुंबकीय व्यक्तित्व थे, जिनका आकर्षण कभी भी खत्म नहीं हो सकता है।
वो भले ही आज सशरीर हमारे बीच मौजूद नहीं लेकिन उनकी आवाज लोगों के दिल-दिमाग में हमेशा जिंदा रहेगी। उनके चाहने वालों की लिस्ट में बहुत सारे अनामी प्रेमी शामिल हैं, जिन्होंने उनके अंदाज, उनकी शायरी और उनके कथनों से केवल शिद्दत से इश्क किया है।
'अमीन सयानी ने रेडियो को हर दौर में जवान रखा'
ऐसे ही एक अनामी प्रेमी हैं लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता- जनसंचार विभाग के प्राध्यापक डा. मुकुल श्रीवास्तव, जिन्होंने वनइंडिया हिंदी से एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए कहा कि 'अमीन सयानी को शब्दों में परिभाषित करना मुश्किल ही नहीं नामुमकीन हैं। उन्होंने रेडियो को हर दौर में जवान रखा और उनकी सबसे बड़ी खासियत ये रही कि वो हर उम्र के लोगों के चहेते रहे, उनके जैसे लोग रोज पैदा नहीं होते हैं।'
'उन्होंने शिद्दत से अपने काम से इश्क किया'
उनकी यूएसपी के बारे में पूछे जाने पर डॉ. मुकुल श्रीवास्तव ने कहा कि 'अमीन सयानी ने वही कहा जो उन्होंने पढ़ा,चाहे गीत हो, गजल हो, किस्से हो या कुछ और... उनकी बातों का असर होता था और लोगों का पता था कि उनके कथन गलत नहीं होंगे, उन्होंने लोगों की मोहब्बत इसलिए कमाई क्योंकि उन्होंने शिद्दत से अपने काम से इश्क किया।'
'आज लोग किताबों की जगह वायरल चीजों को तवज्जो देते हैं'
'यही उनकी खासियत थी और यही उनकी यूएसपी भी है। आज कल लोग किताबों की जगह वायरल चीजों को तवज्जो देते हैं और यही बड़ा कारण है कि कोई दूसरा अभी तक अमीन सयानी नहीं बन पाया।'
'मैं एक शोर नहीं जो गुम हो जाऊंगा'
एक कार्यक्रम में अमीन सयानी ने कहा था कि 'मैं एक शोर नहीं जो गुम हो जाऊंगा, मैं एक स्वर हूं जो बजता रहूंगा', इसका जिक्र होने पर डॉ. मुकुल श्रीवास्तव ने कहा कि 'बिल्कुल ये बात सही है, आज दौर शोर का है, लोग बहुत ज्यादा हल्ला मचाते हैं लेकिन अमीन सयानी ने अपने स्वरों से लोगों को तब मनोरंजित किया जब लोगों के पास मनोरंजन का कोई माध्यम नहीं था।'
'मैं भी उनका अनामी प्रेमी हूं...'
'वक्त बदला, लोगों का टेस्ट बदला लेकिन इस बदलाव ने ना तो अमीन सयानी को बदला और ना ही उनके अंदाज को। मैं भी उनका एक अनामी प्रेमी हूं और मेरी नजर में उनका वो ही स्थान है, जो कि गायिकी में लता मंगेशकर का और अभिनेताओं में दिलीप कुमार का है। उनका जाना अपूर्णनीय क्षति है, जिसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता है। '
'बिनाका गीतमाला' से अमीन सयानी ने रचा इतिहास
आपको बता दें कि रेडियो के बादशाह कहे जाने वाले अमीन सयानी का मंगलवार को हार्ट अटैक की वजह से निधन हो गया। रेडियो सिलोन और विविध भारती पर प्रसारित 'बिनाका गीतमाला' से उन्होंने 42 साल तक लोगों को मनोरंजित किया। ऑल इंडिया रेडियो को लोकप्रिय बनाने में उनका अहम रोल था। साल 2009 में उन्हें 'पद्मश्री' से भी सम्मानित किया गया था।
54,000 से ज्यादा रेडियो कार्यक्रम प्रोड्यूस किए
उन्होंने कई फिल्मों में भी काम किया था, जिनमें 'तीन देवियां', 'भूत बंग्ला', 'बॉक्स', जैसी फिल्मों का नाम लिया जा सकता है। यही नहीं उन्होंने 54,000 से ज्यादा रेडियो कार्यक्रम प्रोड्यूस भी किए थे। उनके निधन से उनके फैंस बहुत ज्यादा दुखी हैं और बहुत सारे लोगों ने सोशल मीडिया पर उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है।












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