जया-अमर के आने से 'रालोद' हुई रंगदार, बिगड़ेगा सपा का खेल

नई दिल्ली। लोकसभा चुनावों की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। जोड़-तोड़ की राजनीति भी जोर-शोर से चालू है। जहां बीजेपी दलितों और मुस्लिमों को रिझाने में लगी हुई है वहीं दूसरी ओर सोमवार को एक अप्रत्याशित घटना हुई।

सपा सुप्रीमों के कभी हमसाये रहे ठाकुर अमर सिंह और उनकी साथी जयाप्रदा ने अजीत सिंह की पार्टी यानी राष्ट्रीय लोकदल पार्टी को ज्वाइन कर लिया। और अप्रत्यक्ष रूप से अमर सिंह-जया प्रदा कांग्रेस के साथ हो गये।

अमर सिंह औऱ जयाप्रदा रालोद और यूपीए के लिए कितने फायदेमंद साबित होंगे यह तो 16 मई को पता चल जायेगा जिस दिन चुनावी नतीजे आयेंगे लेकिन इतना तो तय है कि अब दोनों के आ जाने से रालोद, जो कि चेहरा विहीन पा्र्टी थी, को एक शानदार चेहरा और वक्ता मिल गया है। अमर सिंह जहां वाकपटु कहे जाते हैं तो वहीं जयाप्रदा भी उन चेहरों में से एक हैं जिनकी रैलियों में लोग आते हैं।

Did You Know: जयाप्रदा ने सांसद निधि से बहुत कम खर्च किया

जयाप्रदा ने साल 2009 में सपा सीट से रामपुर का चुनाव जीता था लेकिन अब वह सपा छोड़कर आगे निकल चुकी है। रालोद एक ऐसा दल है जिसमें अजीत सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी को अलावा कोई भी चर्चित व्यक्ति नहीं हैं। ऐसे में वोटरों को लुभाने के लिए उन्हें दो फेमस चेहरे की तलाश थी जो कि अब अमर सिंह और जयाप्रदा ने पूरी कर दी है।

रामपुर से सांसद जयाप्रदा ने की कितनी कमायी, कितना खर्च?

इन दोनों के आने से निश्चित तौर पर वोटरों पर प्रभाव पड़ेगा ऐसा राजनैतिक समझ रखने वाले लोगों का कहना है क्योंकि अमर सिंह और जयाप्रदा यूपी में सपा का गणित बिगाड़ सकने की पूरी कूबत रखते हैं।

मौजूदा स्थिति पर ध्यान दें तो कांग्रेस ने रालोद को 8 सीटों पर लड़ने की इजाजत दी हैं, जिनमें से 5 पर रालोद पिछले चुनाव में जीत चुकी है। 5 में से एक सीट पर अजीत सिंह और दूसरे पर उनके पुत्र जयंत सांसद हैं।

बाकी 5 में से 2 अमरोहा और 1 बिजनौर की सीट हैं। लेकिन अमरोहा के सांसद नागपाल अब सपा में जा चुके हैं तो वहीं बिजनौर के सांसद संजय चौहान पर रालोद दांव नहीं लगाना चाहती है इसलिए ऐसे कयास लगाये जा रहे हैं कि हो सकता है कि अजीत सिंह अमरोहा से अमर सिंह को और बिजनौर से जयाप्रदा को टिकट दें दे।

खैर आगे क्या होगा यह तो कुछ दिनों में पता ही चल जायेगा लेकिन हां इतना जरूर हो गया है कि अब चुनावी प्रचारों में लोग अमर सिंह और जयाप्रदा के जरिये ही सही रालोद को भी परिचर्चाओं में तवज्जो देंगे।

आपको बता दें कि मुलायम से अलग होने के बाद अमर सिंह ने 'लोकमंच' नाम की एक नई पार्टी का गठन किया था, लेकिन उत्तर प्रदेश में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था।

इस बारे में आपकी क्या राय है? अपनी बात नीचे लिखे कमेंट बॉक्स में जरूर दर्ज करायें।

Did You Know: जयाप्रदा उन सांसदों में से एक हैं, जिन्होंने अपनी सांसद निधि से बहुत कम खर्च किया। 2004 से 2009 के बीच जयाप्रदा ने मात्र 31 फीसदी धन खर्च किया।

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