दलित साथी के शोषण का मामला: IIT कानपुर के 4 प्रोफेसरों को मिली राहत, NCSC के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक
इलाहाबाद। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) की सिफारिशों पर रोक लगा दी जिसमें आईआईटी कानपुर के निदेशक ने अनुसूचित जाति के सहायक प्रोफेसर के खिलाफ अत्याचार करने के लिए चार संकाय सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए कहा था। न्यायधीश कृष्ण मुरारी और अशोक कुमार की पीठ ने ईशान शर्मा और तीन अन्य लोगों द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान आदेश पारित किया।

अदालत ने याचिकाकर्ताओं, राजीव शेखर, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद की निदेशक के रूप में नियुक्ति और एयरोस्पेस डिपार्टमेंट के विभागीय फैकल्टी मामलों की समिति की सदस्यता से संकाय सदस्यों को हटाने की दिशा में अपनी सिफारिश पर भी रोक लगा दी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि आईआईटी कानपुर का प्रशासन कानून के अनुसार यदि वे ऐसा चाहते हैं तो प्रोफेसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के लिए आगे बढ़ सकता है।
अदालत ने आयोग को नोटिस जारी किया और सहायक प्रोफेसर एस सदरेला को इस मामले में हलफनामे के लिए निर्देशित किया। एयरोस्पेस विभाग के सहायक प्रोफेसर सदरेला ने चार संकाय सदस्यों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था और एनसीएससी के समक्ष उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था। याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि आयोग ने अपने अधिकार क्षेत्र से परे कार्य किया था और इस तरह की सिफारिशों को पारित करने की कोई शक्ति नहीं थी। अदालत ने भी कहा कि आयोग के क्षेत्राधिकार में ऐसे आदेश देने की अनुमति नहीं है।












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