NEET-JEE EXAM: जिसके लिए दिन-रात एक किया उसी परीक्षा से क्यों डर रहे छात्र ?
नई दिल्ली। नीट और जेईई (मेन) वे दो बड़ी प्रतियोगी परीक्षाएं हैं जिनसे हर साल देश के लाखों बच्चों का भविष्य निर्धारिता होता है। इस बार सितम्बर में इन परीक्षाओं को आयोजित कराया जा रहा है। छात्र इन परीक्षाओं के लिए साल भर तैयारी करते हैं और इसे सफल करना एकमात्र सपना होता है लेकिन इस बार माहौल अलग है। छात्र ही इन परीक्षाओं का विरोध कर रहे हैं। वजह है देश भर में कोविड19 के बढ़ते मामले, जिसके चलते छात्रों के मन में स्वास्थ्य को लेकर डर बैठा हुआ है।
कोविड से सुरक्षा को लेकर घबराए छात्र सोशल मीडिया पर विरोध कर रहे हैं तो कुछ इसे लेकर कोर्ट तक गए। हालांकि परीक्षा को आयोजित कराने वाली राष्ट्रीय टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने इसकी डेट आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की याचिका ये कहते हुए खारिज कर दी 'आखिर हमें इसके साथ चलना है और छात्रों के भविष्य को जोखिम में नहीं डाला जा सकता। परीक्षा को रद्द करने से पूरा शैक्षिक सत्र बरबाद हो जाएगा जो कि सही नहीं होगा।'
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इसके बाद भी सोशल मीडिया पर छात्रों का विरोध जारी है। आइए ऐसे में इन छात्रों के डर को समझने की कोशिश करते हैं। साथ ही ये भी जानते हैं कि आखिर जो छात्र इन परीक्षाओं के लिए इतने मन से साल भर तैयारी करते हैं वही इसे क्यों आगे बढ़ाना चाहते हैं।

छात्र क्यों आगे बढ़ाना चाहते हैं एग्जाम डेट
देश भर में कोरोना के ताजा आंकड़े 32 लाख तक हो चुके हैं और रोज कोरोना के 60 हजार से ऊपर पॉजिटिव केस सामने आ रहे हैं। ऐसे में छात्रों को डर है कि एग्जाम सेंटर जाने के दौरान रास्ते में या फिर सेंटर पर वो इस वायरस के असर में आ सकते हैं जो कि उनके और परिवार के लिए खतरनाक होगा। साथ ही छात्र इस बात से भी तनाव में हैं कि इतने महत्वपूर्ण परीक्षा में उन्हें हैंड ग्लब्स और फेस मास्क के साथ बैठना होगा।
वाराणसी की तान्या उपाध्याय इस बार नीट की परीक्षा के लिए फॉर्म भरा है। वन इंडिया हिंदी से बातचीत में तान्या ने बताया कि परीक्षा को लेकर छात्र पहले से ही तनाव में रहते हैं ऐसे में कोरोना का डर, गल्ब्स और मास्क के साथ परीक्षा देना तनाव को और बढ़ा देगा। हालांकि परीक्षा में शामिल होने के सवाल पर तान्या कहती हैं कि अगर परीक्षा होती है तो शामिल होना हमारी मजबूरी है। हम सत्र खराब नहीं कर सकते।

देश के कई हिस्सों में बाढ़ का प्रकोप
परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए केवल कोविड ही समस्या नहीं है। इसी समय देश के बिहार और असम जैसे राज्य बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन अस्त व्यस्त है। गांव के गांव जलमग्न हैं और आने-जाने के रास्ते भी पानी में डूबे हुए हैं। वहीं बिहार सरकार ने कोविड 19 के फैलाव को देखते हुए 6 सितम्बर तक लॉकडाउन लगा रखा है।
अगर छात्र परीक्षा देने जाते भी हैं तो उनके सामने सेंटर पर पहुंचना ही सबसे बड़ी समस्या है। बिहार के 32 जिलों में केवल 2 सेंटर ही बनाए गए हैं। प्रदेश का बड़ा क्षेत्र बाढ़ प्रभावित है और आवागमन के साधन नहीं चल रहे हैं। छात्र किस तरीके से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचेंगे। कई छात्रों के सेंटर तो 100 से 150 किमी दूरी पर स्थित हैं। ऐसे में छात्रों को कई दिन पहले ही घर से रवाना होगा। कोविड 19 के समय में छात्र कहां रुकेंगे, क्या खाएंगे, ये बड़ा सवाल है।

सरकार का क्या है कहना ?
परीक्षा कराने वाली एजेंसी एनटीए, जो कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का हिस्सा है, का कहना है कि महामारी के चलते पहले ही कई बार परीक्षा की डेट को बढ़ाया जा चुका है। इसे अब और नहीं टाला जा सकता। एनटीए ने परीक्षा के दौरान किए जाने वाले सुरक्षात्मक उपायों की भी जानकारी दी है। इसके मुताबिक परीक्षा के पहले और बाद में केंद्र को सैनिटाइज किया जाएगा। छात्रों को मास्क और ग्लव्स दिए जाने के साथ ही तापमान चेक किया जाएगा और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाएगा।
इसके साथ ही परीक्षा केंद्रों को बढ़ाए जाने की बात भी कही गई है ताकि सेंटर पर कम बच्चे हों। हालांकि छात्र इन आश्वासनों से पूरी तरह निश्चिंत नहीं हो पा रहे। खासतौर पर जब यूपी में बीएड के साथ ही केरल और कर्नाटक में हुई परीक्षाओं में सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियां उड़ी थीं। इस बार नीट की परीक्षा देने की तैयारी कर रहीं तान्या उपाध्याय कहती हैं कि अगर परीक्षा को ऑफलाइन की जगह ऑनलाइन कराया जाता तो बेहतर होता।

ये एग्जाम क्यों जरूरी हैं ?
नीट और जेईई भारत में होने वाली बड़ी परीक्षाओं में से एक हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि सितम्बर के पहले दो सप्ताह में होने जा रही इस बार की परीक्षा में लगभग 25 लाख छात्रों के हिस्सा लेने की संभावना जताई जा रही है। इतने बड़े पैमाने पर छात्रों के परीक्षा में शामिल होने से परीक्षा केंद्रों पर भीड़ लगती है। यही वजह है कि छात्र चाह रहे हैं कि इन परीक्षाओं को आगे के लिए टाल दिया जाय या फिर एडमिशन के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
वहीं ये बात भी महत्वपूर्ण है कि जहां नीट-जेईई को टालने से इनकार कर दिया है वहीं कई बड़े एग्जाम ऐसे भी हैं जिन्हें आयोजित कराने वाली एजेंसियों ने टाल दिया है। ऐसे ही कुछ एग्जाम पर नजर डालते हैं।

यूपीपीएससी ने परीक्षा तिथि बढ़ाई
उत्तर प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग ने आरओ और एआरओ परीक्षा की तिथि बढ़ा दी है। ये परीक्षा 13 सितम्बर को होने वाली थी। अब इसकी नई तिथि 20 सितम्बर को जारी की गई है। इसके साथ ही आयोग ने अभ्यर्थियों को अपने नजदीकी परीक्षा केंद्र चुनने की अनुमित भी दी है।
आरओ, एआरओ की परीक्षा प्रदेश के 17 जिलों में कराई जा रही है। छात्रों को इनमें से नजदीकी तीन जनपद केंद्र के रूप से चुनने होंगे। ये जनपद हैं- आगरा, अयोध्या, आजमगढ़, बाराबंकी, बरेली, गाजियाबाद, गोरखपुर, जौनपुर, झांसी, कानपुर नगर, लखनऊ, मथुरा, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, रायबरेली और बाराबंकी। अभ्यर्थी आयोग की वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर जाकर अपना जनपद चुन सकते हैं।

एमपीएससी ने टाली परीक्षा
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग ने अपनी परीक्षाओं को कोविड 19 के प्रभाव के चलते टाल दिया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि कोविड 19 के बढ़ते केस के चलते स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आयोग की परीक्षाएं टाली जा रही हैं। परीक्षाओं की अगली तिथि बाद में घोषित की जाएगी। एक वीडियो मैसेज में उद्धव ठाकरे ने कहा कि 'महाराष्ट्र सरकार परीक्षा के खिलाफ नहीं है। लेकिन जून में अगर हम परीक्षा लेने की स्थिति में नहीं थे, आज ये संकट और बढ़ गया है तो हम परीक्षा कैसे ले सकते हैं।'
मुख्यमंत्री ने बताया कि जून महीने में सरकार ने विश्वविद्यालय के छात्रों को इंटर्नल एग्जाम में प्राप्त अंकों के आधार पर पास करने का फैसला किया था।












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