एकतरफा अतिरिक्त न्यायिक तलाक के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम वुमन पर्सनल लॉ बोर्ड ने SC का खटखटाया दरवाजा
ऑल इंडिया मुस्लिम वुमन पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमडब्ल्यूपीएलबी) और न्यायबोध फाउंडेशन ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मुस्लिम महिलाओं को बिना तय प्रक्रिया का पालन किए तलाक देने का निर्देश देने की मांग की।
ऑल इंडिया मुस्लिम वुमन पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमडब्ल्यूपीएलबी) और न्यायबोध फाउंडेशन ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मुस्लिम महिलाओं को बिना तय प्रक्रिया का पालन किए तलाक देने का निर्देश देने की मांग की। याचिकाकर्ता को ऑल इंडिया मुस्लिम वुमन पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर और न्यायबोध फाउंडेशन की अध्यक्ष एडवोकेट रितु दुबे के माध्यम से स्थानांतरित किया गया है।

याचिकाकर्ता ने एकतरफा अतिरिक्त न्यायिक तलाक की शिकार विभिन्न महिलाओं की शिकायतों को उठाया है। याचिका में प्रतिवादियों को यह निर्देश जारी करने की मांग की गई है कि मुस्लिम महिलाओं को मध्यस्थता और सुलह की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना एक गवाह की उपस्थिति में दिए गए तलाक को पूर्वव्यापी रूप से नल एंड व्यॉड घोषित किया जाए।
याचिका में तलाकशुदा महिलाओं और उनके बच्चों के लिए आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के संबंध में सभी उत्तरदाताओं को पूर्वव्यापी तरीके से दिशा-निर्देश या दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है। क्योंकि तलाक के ऐसे मनमाने रूपों के कारण बच्चे अपने मूल मौलिक अधिकारों (भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, आश्रय,गरिमा) के साथ जीवन जीने से वंचित हैं।
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