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All India Judicial Services: क्यों राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के विचारों में छिपा है बड़ा संदेश?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जिस मौके पर आईएएस,आईपीएस की तर्ज पर अखिल भारतीय न्यायिक सेवा की वकालत की है, उसमें देश की न्यायिक व्यवस्था के लिए बड़ा संदेश छिपा हुआ है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने पिछले 26 नवंबर को संविधान दिवस पर आयोजित एक ऐसे कार्यक्रम में अपनी बात रखी है, जिसमें सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ समेत सुप्रीम कोर्ट के तमाम जज और केंद्रीय कानून राज्यमंत्री भी मौजूद थे।

president droupadi murmu and aijs

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के युवाओं के टैलेंट पर जताई खुशी
सुप्रीम कोर्ट में आयोजित इस कार्यक्रम में ऑल इंडिया ज्यूडिशियल सर्विस (AIJS) के गठन का मामला उठाते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि जब देश के विश्वविद्यालयों, आईआईटी या आईआईएम में जाती हूं तो बच्चों से बात करने का मौका मिलता है और तब पता चलता है कि देश में ऐसा भी टैलेंट है, जो न्यायपालिका में आना चाहता है, लेकिन आ नहीं पाता।

सरकार या न्यायपालिका, किसकी ओर है राष्ट्रपति का इशारा?
उन्होंने कहा, ' (ये बच्चे) इतने टैलेंटेड हैं...कभी-कभी उनको पूछती हूं कि आप क्या बनना चाहते हैं...कोई कहता है कि आईएएस, आईपीएस बनना चाहता हूं और कुछ कहते हैं कि ज्यूडिशरी में जाना चाहता हूं....तो मुझे लगता है कि ऐसा कुछ किया जाए जो यहां आ सकें....मुझे लगता है कि युवा हैं, प्रतिभावान है, ऊर्जावान हैं, देश के लिए समर्पित हैं...मुझे लगता है कि ऐसा कुछ किया जाए कि वो बच्चे चुन के यहां आ सकें....जो लोग बेंच में शामिल होने की इच्छा रखते हैं, उन्हें देश भर के टैलेंट पूल से चुना जा सकता है।'

'अखिल भारतीय न्यायिक सेवा हो सकती है'
राष्ट्रपति मुर्मू ने आगे यह भी कहा, 'आईएएस, आईपीएस के लिए एक अखिल भारतीय परीक्षा होती है। एक अखिल भारतीय न्यायिक सेवा हो सकती है, जिसमें प्रतिभावान युवाओं को चुना जा सकता है और उनके टैलेंट को निचले स्तर से उच्च स्तर तक ले जाया जा सकता है।'

जस्टिस डिलिवरी सिस्टम में मजबूती की बात
राष्ट्रपति मुर्मू बोलीं कि न्यायपालिका और सरकार इसके लिए रास्ता निकाल सकती है, ताकि अखिल भारतीय न्यायिक सेवा के माध्यम से युवा प्रतिभाएं न्यायपालिका में अपना करियर बना सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'न्यायपालिका में इन प्रतिभाशाली युवाओं का उपयोग और उन्हें अवसर देने से जस्टिस डिलिवरी सिस्टम में मजबूती आ सकती है।'

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ऐसे समय में यह विषय छेड़ा है, जब देश की हायर ज्यूडिशरी कॉलेजियम सिस्टम की व्यवस्था की वजह से चर्चा में रहती है।

विधि आयोग ने 1986 में ही की थी सिफारिश
वैसे ऑल इंडिया ज्यूडिशियल सर्विस (AIJS) के गठन की सिफारिश विधि आयोग ने 1986 में अपनी 116वीं रिपोर्ट में ही की थी।1992 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सिफारिशों पर तेजी से अमल के पक्ष में राय दी थी। लेकिन, बाद के वर्षों में यह बहस का मुद्दा रहा और इसके हितधारकों के बीच मतभेद की वजह से यह लटका ही रहा है।

ऑल इंडिया ज्यूडिशियल सर्विस रहा है बहस का मुद्दा
2016 में केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में माना था कि इसको लेकर सरकार और न्यायपालिका के बीच गतिरोध है। जनवरी 2017 में कानून मंत्रालय ने इसपर औपचारिक चर्चा भी की थी। 2018 में एआईजेएस के गठन की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गई, लेकिन अदालत ने इसपर विचार करने से इनकार कर दिया। क्योंकि, उसे लगा कि पीआईएल में 'न्यायिक आदेश' जारी करने लायक कुछ नहीं है।

केंद्र की राय क्या है?
2021 में तत्कालीन केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने एक बयान में दावा किया था कि 8 राज्य और 13 हाई कोर्ट एआईजेएस के पक्ष में नहीं हैं। जबकि, केंद्र सरकार की राय थी कि 'संपूर्ण तरीके से जस्टिस डिलिवरी सिस्टम को मजबूत करने के लिए सही रूप से तैयार अखिल भारतीय न्यायिक सेवा अहम है।'

इन परिस्थितियों में राष्ट्रपति की ओर से अखिल भारतीय न्यायिक सेवा की वकालत करना सरकार और न्यायपालिका दोनों के लिए स्पष्ट संदेश की तरह है कि वह देश की न्याय व्यवस्था को और बेहतर, तेज और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने लायक बनाने के लिए अपने प्रयास तेज करें।

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