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आखिर क्या है भारत का मिशन Chandrayaan, चंद्रमा की सतह पर भारत के वैज्ञानिकों की धाक बन रहा यह अभियान

Chandrayaan 3: भारत मिशन मून पर ऐतिहासिक कदम बढ़ाने जा रहा है। इसरो 14 जुलाई को मिशन चंद्रयान 3 को लॉन्च करने जा रहा है। इस मिशन को सफल बनाने के लिए कई एजेंसियां मिलकर साथ काम कर रही हैं। इस मिशन का लाइव प्रसारण भी किया जाएगा ताकि देशवासी इस ऐतिहासिक पल के गवाह बन सके।

चंद्रयान-1
पहले चंद्रयान मिशन की बात करें तो इसे 2008 में लॉन्च किया गया था, इसे सफलतापूर्वक लूनर ऑर्बिट में भेजा गया था।
22 अक्टूबर 2008 को इस मिशन को पीएसएलवी रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया था। चंद्रयान-1 ने सफलतापूर्वक 8 नवंबर को चंद्रमा के ऑर्बिट में प्रवेश किया था।

Chandrayaan

अगले चार दिनों तक इसने 100 किलोमीटर का सर्कुलर पूरा किया था। जिसकी मदद से चंद्रमा के बारे में कई अहम जानकारिया मिली थीं। इसमे कुल 11 इंस्ट्रूमेंट लगे थे, जिसमे से आधे से ज्यादा नासा की ओर से मुहैया कराए गए थे।

चंद्रयान-2
इस मिशन का मुख्य लक्ष्य चंद्रमा के ऑर्बिट में लैंडर और रोवर को पहुंचाना था। इसे जुलाई 2019 में लॉन्च किया गया था। चंद्रयान 2 की बात करें तो इसे 2019 में लॉन्च किया गया था, यह भी लूनर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक प्रवेश किया था, लेकिन लैंडर दिशा भ्रमित हो गया और इसने चंद्रमा पर क्रैश लैंडिंग की, जिसके बाद यह मिशन विफल हो गया था।

चंद्रयान-3
चंद्रयान 3 की बात करें तो इसमे स्वदेशी लैंडर मॉड्यूल, प्रोपल्शन मॉड्यूल और रोवर है। इसका मुख्य लक्ष्य अंतरग्रहीय मिशनों के लिए आवश्यक नई तकनीक का विकास करना और विकास और इसका प्रदर्शन करना है। यह लैंडर पूर्वनिर्धारित जगह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने में सक्षम है, यहां रोवर को तैनात कर सकता है, जोकि केमिकल विश्लेषण के आधार पर सतह पर चल सकता है।

चंद्रयान 3 चंद्रमा की सतह पर 23-24 अगस्त को सॉफ्ट लैंडिंग कर सकता है। इस लैंडिंग का मुख्य लक्ष्य इसकी सुरक्षित और सेफ लैंडिंग है, जिसपर इसरो का पूरा ध्यान केंद्रित होगा। इसरो के चीफ ने कहा कि हमारा मुख्य लक्ष्य इसकी सुरक्षित और सॉफ्ट लैंडिंग है। इगर सबकुछ सही रहता है तो सारे उपकरण सुरक्षित रहेंगे। हम लैंडिंग सिस्टम के साथ काफी अच्छे हैं।

लैंडिंग के बाद ही रोवर इसके बाहर निकलेगा, जिसमे 6 पहिए लगे हैं। हम उम्मीद कर रहे हैं कि यह रोवर चंद्रमा पर 14 दिन तक चलेगा। यह कई कैमरों की मदद से यहां चलेगा और सतह से कई तस्वीरों को क्लिक करेगा। हमने रोवर पर सोलर पैनल लगा रखा है। हमने पहले ही इसे टेस्ट कर रखा है और हमे इसकी बैटरी से अच्छे नतीजे मिले हैं।

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