ऑपरेशन सिंदूर टिप्पणी में फंसे प्रो. अली खान को 14 दिन की हिरासत से राहत! SC से मिली जमानत, अब SIT करेगी जांच
Ali Khan Mahmudabad Bail:'ऑपरेशन सिंदूर' पर टिप्पणी को लेकर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए अशोका यूनिवर्सिटी के राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को बड़ी राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रोफेसर अली खान को अंतरिम जमानत दे दी है। अब वे फिलहाल जेल से बाहर रह सकते हैं, लेकिन कोर्ट ने साफ निर्देश दिए हैं कि वे अब आतंकी हमलों या भारत की सैन्य कार्रवाई पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। साथ ही, उन्हें अपना पासपोर्ट भी जमा करना होगा।
कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए एक 3 सदस्यीय SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) बनाने का आदेश दिया है, जिसमें एक महिला अधिकारी भी शामिल होंगी और वे राज्य से बाहर की होंगी ताकि जांच निष्पक्ष रहे।

क्यों हुआ था इतना विवाद?
प्रोफेसर अली खान ने भारतीय सेना की महिला अधिकारियों - कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह - द्वारा की गई प्रेस ब्रीफिंग को 'पाखंड' और 'प्रकाशिकी' (optics) कहा था। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और बीजेपी युवा मोर्चा की एक नेता ने उनके खिलाफ शिकायत कर दी। इसके बाद हरियाणा महिला आयोग ने भी मामले पर संज्ञान लिया।
यूनिवर्सिटी ने किया बचाव
अशोका यूनिवर्सिटी के फैकल्टी एसोसिएशन ने प्रोफेसर अली खान का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी गिरफ्तारी बेबुनियाद है और यह अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ है। उन्होंने प्रोफेसर को यूनिवर्सिटी का अहम और जिम्मेदार सदस्य बताया। साथ ही कहा कि हम मामले के विवरण का पता लगाने की प्रक्रिया में हैं। यूनिवर्सिटी पुलिस और स्थानीय अधिकारियों के साथ जांच में पूरा सहयोग करना जारी रखेगी।
सुप्रीम कोर्ट में कौन लड़े केस?
इस पूरे मामले में अली खान की ओर से कोर्ट में पैरवी वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल कर रहे हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अली खान की गिरफ्तारी को चुनौती दी, जिसके बाद उन्हें राहत मिल गई।












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